धर्म की रक्षा के लिए किया गया कार्य किसी एक समाज तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह संपूर्ण राष्ट्र की धरोहर बन जाता है

Uncategorized

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग की ओर से इतिहास के उस काल में जिसमें गुरु पुत्रो की शहादत के समय मानवता, करुणा एवं धर्मनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत करने वाले सेठ टोडरमल जैन के महान कार्य के प्रति शुकराना अदा करने हेतु जैन समाज को आमंत्रित करते हुए विशेष श्रद्धांजलि एवं कृतज्ञता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि सरहिंद में छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह , बाबा फतेह सिंह जी एवं माता गुजरी की शहादत के पश्चात जब उनके अंतिम संस्कार हेतु भूमि तक उपलब्ध नहीं थी, तब सेठ टोडरमल ने शहीद शरीर जितने स्थान पर रखा जा सकता था उतने स्थान पर सोने की मोहरे खड़ी कर दुनिया की सबसे महंगी जमीन सोना अर्पित कर खरीदी और पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार संपन्न कराया। यह कार्य भारतीय इतिहास में मानवीय मूल्यों, आपसी सद्भाव और सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है।
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि सेठ टोडरमल जैन का यह बलिदान यह संदेश देता है कि मानवता और धर्म की रक्षा के लिए किया गया कार्य किसी एक समाज तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह संपूर्ण राष्ट्र की धरोहर बन जाता है। आयोग का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से जैन–सिख एकता और भारतीय संस्कृति की साझा विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है।
इस शुकराना कार्यक्रम में जैन समाज के सम्माननीय पदाधिकारी, धर्मगुरु, प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि नागरिक उपस्थित रहेंगे। दिनांक 29 दिसंबर को दोपहर 12.30 बजे राज्य अल्पसंख्यक आयोग में यह कार्यक्रम रखा गया है कार्यक्रम के दौरान सेठ टोडरमल जैन जी के जीवन, उनके त्याग एवं सेवा भाव पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा तथा श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने समस्त जैन समाज एवं सर्व समाजजनों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन में सहभागिता कर सामाजिक सौहार्द एवं एकता के इस संदेश को और अधिक सशक्त बनाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *