कुख्यात अपराधी तोमर बंधु के समर्थन में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत नई प्रथा की शुरुआत..

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रायपुर : छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है—गंभीर अपराधों में शामिल लोगों के समर्थन में समाज के कुछ प्रतिनिधि और संगठनों का खुलकर आगे आना। इससे कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं और यह संदेश भी जा रहा है कि यदि किसी अपराधी के पीछे प्रभावशाली लोग खड़े हो जाएं, तो उसके अपराधों की गंभीरता कम हो जाती है। यह बहस इसलिए और गहरी हो गई है क्योंकि रायपुर के कुख्यात सूदखोर और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त वीरेंद्र सिंह तोमर उर्फ रूबी सिंह और उसके भाई रोहित तोमर के पक्ष में करणी सेना के राष्ट्रीय पदाधिकारी खुलकर सामने आ गए।

पांच महीने तक परेशान पुलिस, ग्वालियर में दबोचे गए आरोपी

रायपुर पुलिस इन दोनों कुख्यात आरोपियों को पकड़ने के लिए पांच महीनों से लगातार प्रयासरत थी। सूदखोरी, धमकी, जमीन हड़पने, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के कारण कई पीड़ितों ने आत्महत्या तक कर ली थी। इन अपराधों की वजह से पूरा रायपुर शहर भय और तनाव के माहौल में था।

पुलिस ने लंबी तलाश के बाद बड़े भाई रोहित तोमर को ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से गिरफ्तार किया। इसके बाद छोटे भाई वीरेंद्र सिंह तोमर को भी गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने शहर में उसका जुलूस निकालकर संदेश दिया कि अपराधियों के साथ सख्त कार्रवाई ही छत्तीसगढ़ की नीति है। इस कदम को कई लोगों ने पुलिस की मजबूती बताया, तो कुछ ने इसे अनावश्यक कठोरता का रूप कहा।

करणी सेना का विरोध और सोशल मीडिया पर धमकी

इसी बीच मामला तब और तूल पकड़ गया जब करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने रायपुर एसपी लाल उमेद सिंह और मौदहा पारा थाना प्रभारी योगेश कश्यप पर कार्रवाई का विरोध करते हुए आपत्तिजनक बयान दिए। इतना ही नहीं, पुलिस अधिकारियों के घर तक घुसने की धमकी देकर उन्होंने कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दे डाली।

राज शेखावत के इन बयानों के बाद तनाव बढ़ गया और पुलिस ने उनके खिलाफ मौदहा पारा थाना में FIR दर्ज कर ली। इसके बाद उन्हें तलाशने की कार्रवाई शुरू की गई।

संगठनों के समर्थन पर उठे सवाल

अपराधियों को पकड़ने के बाद जिस तरह से समाज के एक तबके द्वारा विरोध जताया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। यह संदेश जाने लगा कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के बाद भी यदि समाज या संगठन का समर्थन मिल जाए, तो अपराधियों का मनोबल बढ़ सकता है।
रायपुर के नागरिक लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि—

क्या समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों को अपराधियों के पक्ष में खड़े होना चाहिए?

क्या यह प्रवृत्ति कानून व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं बन जाएगी?

क्या अपराध को जाति या समाज के चश्मे से देखने की शुरुआत हो चुकी है?

छत्तीसगढ़ की जनता लंबे समय से सूदखोरी और गिरोहबाज़ी से प्रभावित रही है। कई पीड़ित परिवार आज भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में किसी अपराधी के समर्थन में प्रदर्शन या धमकी देने की घटना न केवल पीड़ितों का मनोबल गिराती है बल्कि पुलिस-प्रशासन के लिए भी मुश्किलें खड़ी करती है।

आखिरकार पुलिस के सामने पहुँचे करणी सेना अध्यक्ष

प्रकरण के बढ़ने पर करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत ने आखिरकार रायपुर के मौदहा पारा थाना पहुंचकर गिरफ्तारी देने का निर्णय लिया। पुलिस अब उनके खिलाफ दर्ज मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।

मायने

छत्तीसगढ़ में अपराधियों के समर्थन में समाज या संगठनों का उतरना एक खतरनाक उदाहरण साबित हो सकता है। यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है बल्कि पीड़ितों के लिए भी अन्यायपूर्ण परिस्थितियाँ पैदा करता है। पुलिस ने जिस प्रकार से लगातार कार्रवाई करके दोनों कुख्यात आरोपियों को जेल भेजा, उससे यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि प्रदेश में अपराध और आतंक फैलाने वालों के साथ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी—चाहे उनके समर्थन में कोई भी खड़ा क्यों न हो।

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