New Delhi. : जानकारों के मुताबिक भारत के दुनिया में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के दावों के बीच देश को औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा झटका लगा है। सूत्रों से मिली जानकारी मुताबिक देश में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार अप्रैल में 2.7 % की गिरावट दर्ज की गयी गई। सालभर पहले के इसी महीने में 5.2% ग्रोथ के मुकाबले यह 2.7% पर आ गई। मार्च में यह 3.9% थी।
साख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आकड़ों के मुताबिक, माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टरों में कमजोरी के चलते ओवरऑल ग्रोथ नीचे रही जिसे इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) में बढ़त के रूप में देखा जाता है।
औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईपीपी) के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में खनन क्षेत्र का उत्पादन 0.2 प्रतिशत घटा और आठ महीनों में पहली बार उसमें गिरावट आई। बिजली क्षेत्र का उत्पादन 1.1 प्रतिशत बढ़ा मगर इसकी रफ्तार भी पिछले सात महीने में सबसे सुस्त रही। अप्रैल में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन भी सुस्त होकर केवल 3.4 प्रतिशत बढ़ा। अप्रैल में आईआईपी 5.2 प्रतिशत बढ़ा था।
प्राथमिक वस्तुओं का उत्पादन 0.4 प्रतिशत घटा, जो अगस्त 2024 के बाद पहली गिरावट है। इस महीने में कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स का उत्पादन 1.7 प्रतिशत घटा, जो लगातार तीसरे महीने आई गिरावट है। मगर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में उत्पादन 6.4 प्रतिशत की तेज रफ्तार से बढ़ा।
इस बीच पूंजीगत वस्तु क्षेत्र का उत्पादन उछलकर 18 माह के उच्च स्तर 20.3 प्रतिशत पर पहुंच गया। इससे देश में निवेश गतिविधियां बढ़ने का पता लगता है। बिजली और गैर बिजली मशीनरी में भी निवेश बढ़ा है। इस महीने इंटरमीडियरी वस्तुओं का उत्पादन बढ़कर 4.1 प्रतिशत रहा। अप्रैल में 23 में से 16 क्षेत्रों में वृद्धि देखी गई और तीन महीने में पहली बार इतने क्षेत्रों में वृद्धि दिखी है। इन क्षेत्रों में खाद्य उत्पाद, तंबाकू, कपड़ा, परिधान, लकड़ी के उत्पाद, रबड़ के उत्पाद, बुनियादी धातुएं, कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक आदि थे।