कौशल काव्य धारा का उद्घाटन समारोह

Chhattisgarh

रायपुर : दिनांक 11 जनवरी को सांय 4 बजे से रात 8 बजे तक वृंदावन हाल के सभागार में कला साहित्य और समाज सेवा को समर्पित संस्था कौशल काव्य धारा का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया. विख्यात भाषाविद डाॅ चितरंजन कर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की . छत्तीसगढ हिंदी साहित्य मंडल के अध्यक्ष आचार्य अमरनाथ त्यागी मुख्य अतिथि की भूमिका में उपस्थित रहे. विख्यात साहित्यकार श्री गिरीश पंकज , शासकीय कालेज गुडियारी की प्राचार्या मेडम मधुलिका अग्रवाल , डाॅ माणिक विश्व कर्मा ,डाॅ विजय मिश्रा जी और डाॅ सुधीर शर्मा जी विशिष्ठ अतिथि के रूप मेॅ कार्यक्रम में मंच पर विराजमान रहे . सभी विशिष्ट जनों द्वारा मां सरस्वति की पूजा अर्चना की गई. संस्था के अध्यक्ष डाॅ जे के डागर विद्यासागर ने शाल और पुष्प माला से मंचासीन सभी गणमान्य विभूतियों का सम्मान किया.उनके अति गरिमामय संबोधनों के उपरांत मंच द्वारा ही डाॅ जे के डागर विद्यासागर द्वारा रचित दो पुस्तकों (1) सफलता के 100 सूत्र तथा ( 2) वंदनावली का विमोचन किया गया जो वैभव प्रकाशन ने प्रकाशित की हैं.
पुस्तकों की समीक्षा करते हुए डाॅ विश्वकर्मा ने वंदनावली पुस्तक में लेखक द्वारा संग्रहित 82 दैविक गीतों और भजनों की प्रशंसा करते हुए इन्हें घरों अथवा मंदिर में पूजा के समय गाये जाने योग्य बताया। साथ ही दूसरी पुस्तक ,सफलता के 100 सूत्र ,में समावेसित प्रत्येक सूत्र को व्यक्तित्व विकास पर सुंदर उदाहरणों और लघुकथाओं के माध्यम से सकारात्मक आदतें अपनाकर, जीवन को सफल एवं समाजोपयोगी बनाने में पूर्णतया सक्षम बताया ।
डाॅ जेकेडागर ने जो पूर्व मे भारत सरकार के श्रम मंत्रालय में राष्ट्रीय प्रशिक्षण अकादमी दिल्ली में निदशक के पद पर अपने लंबे कार्यकाल का स्मरण करते हुए बताया कि व्यक्ति की उपलब्धियों में उसके जन्म जात गुणों का योगदान मात्र 15% रहता है ,जबकि व्यक्ति द्वारा सीख कर अपने व्यवहार मे अपनाई आदतों का योगदान 85% रहता है.उन्होंने जीवन के हर क्षेत्र में प्रशिक्षण को अति उपयोगी बताते हुए स्पष्ट किया कि किस प्रकार कोई भी व्यक्ति सकारात्मक सोच रख कर उचित लक्ष्य बनाकर सिस्टेमेटिक तरीके से प्रयास कर जीवन को सफल बना सकता है.
इसके उपरांत उपस्थित कवियों द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें सभी मूर्धन्य कवियों ने अपनी श्रेष्ठ कवितायें पढ़कर गोष्ठी में चार चांद लगाए.
डाॅ चितरंजन कर ने कहा-
मैं खुदको हर बार मिटाया करता हूँ
मैं खुद नया संसार बनाया करता हूँ ।
आचार्य अमरनाथ के अल्फाज थे’-
तेरी दहलीज से सूरज को निकालता देखूं
एक दीया दूर तक राह में जलता देखूं
दिल जलाओ कि दिशाओं मे उजाला फैले
मंजरों में मैं तेरे अक्स को ढलता देखूं
गिरीश पंकज ने कहा
कविता जीवन को रचने की चीज होती है मात्र मनोरंजन की वस्तु नहीं.
डाॅ जेकेडागर ने कहा–
टांग जमाना खींचता लोग करें उपहास
फिर भी जो आगे बढ़ वह रचता इतिहास.
और भी सभी कवियों ने अपनी सशक्त रचनायें पढकर वाहवाही बटोरी.
अंत में कौशल काव्य धारा संस्था के अध्यक्ष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन तथा सुअल्पाहार के बाद कार्यक्रम समाप्त हुआ. उपस्थित सभी जनों द्वारा कार्यक्रम को अति सफल और उपयोगी घोषित किया गया.
जयहिंद

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