बागवानी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम:- भूपेंद्र पांडे

Chhattisgarh

रायपुर : प्रकृति की ओर सोसायटी द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें गृह उद्यान एवं किचन गार्डन के माध्यम से फल और सब्ज़ियों की तैयारी की प्रायोगिक विधि पर चर्चा की गई। सोसायटी के अध्यक्ष मोहन वर्ल्यानी ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आम जनता को बागवानी और किचन गार्डन की विधियों से परिचित कराना है।

इस कार्यशाला में माननीय भूपेंद्र पांडे जी, अपर संचालक, उद्यानिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में गृह उद्यान और किचन गार्डन की महत्ता पर प्रकाश डाला और इसे आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यशाला के प्रथम वक्ता डॉ. अनिल सिंह चौहान, जिन्हें देश और विदेश में इस क्षेत्र का 28 वर्षों का अनुभव है, ने विंटर फ्लावर्स और गार्डन की देखभाल पर रोचक जानकारी दी। उन्होंने गुलाब, सेवंती, मौसमी फूलों और इनडोर पौधों को आधुनिक तरीकों से उगाने और मेंटेन करने के साथ-साथ टेरेस गार्डन और वर्टीकल गार्डन के रखरखाव की सर्वोत्तम विधियों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा, गार्डन में पौधों की सिंचाई के आधुनिक तरीकों से पानी की बचत और फव्वारे एवं झरनों जैसी जल संरचनाओं की देखभाल पर भी उपयोगी सुझाव दिए।

द्वितीव वक्ता डॉ. के.पी. वर्मा, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक (आईजीकेवी), ने जैविक खाद, बीज चयन और पौधों की देखभाल के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि जैसा कि हम सब जानते हैं कि आजकल हम आदतन बारहो महीने सभी सब्जी खाने की आदत सी हो गई है चाहे वह सीजन की हो या ना हो बिना सीजन की सब्जी उगाने में केमिकल,दवाईयो,हार्मोन का भरपूर उपयोग होता है जो हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं इन्हीं कारण हम सब को गृह वाटिका, टेरिस किचन गार्डन करना चाहिए जिससे हम अपनी देखरेख में सब्जी का उत्पादन करने से हमें यह पता होता है कि इसमें कौन सी दवाई का उपयोग किया गया है और कितने दिन बाद सब्जियों को तोड़ना चाहिए जिन लोगों के पास जमीन नहीं है उनको टेरेस में करना चाहिए तथा अपनी पसंद की सब्जियों को सीजन के अनुसार उगाना चाहिए तथा अपने स्वास्थ्य की भरपूर ध्यान रखना चाहिए । यदि हमारे पास जगह की कमी है तो हम टेरिस में कम से कम पत्तेदार सब्जियां बरबटी, मूली, मेथी, धनिया, लहसुन, प्याज, भिंडी, खीरा, करेला, टमाटर, मिर्ची, बैगन आदि को सफलता पूर्वक गमले , ट्रे या खाद की बोरियों में अर्थात जिसमें 6 ,7 इंच मिट्टी आ जाए पर खेती आसानी से की जा सकती है ।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने कृषि वैज्ञानिकों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। प्रश्नोत्तरी सत्र का संचालन डॉ. विजय जैन (वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक) और डॉ. जितेंद्र त्रिवेदी (कृषि वैज्ञानिक, आईजीकेवी) ने किया।

कार्यक्रम का प्रारंभ अध्यक्ष मोहन वर्ल्यानी द्वारा स्वागत भाषण से हुआ, जबकि धन्यवाद ज्ञापन जयेश पिथालिया ने दिया। मंच संचालन राम खटवानी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. किरण अग्रवाल, कर्नल सिद्धार्थ बोस,शिल्पी नागपुरे , मनीषा त्रिवेदी, उषा सिंघल, रश्मि परमार, ममता मिश्रा, सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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