प्रदेश की पहली महुआ शराब की फैक्ट्री बनने से पहले विवादो में घिरी,बस्तर आदिवासी कर रहे विरोध

Chhattisgarh

जगदलपुर :  प्रदेश की पहली महुआ शराब की फैक्ट्री बनने से पहले विवादो में घिरी,बस्तर आदिवासी कर रहे विरोध।शुभांक (मालिक बस्तर बोटेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड) ने दी जानकारी।

बस्तर के लोहंडीगुड़ा क्षेत्र के धुरगांव में बस्तर बोटेनिक्स प्राइवेट लिमिटेड नमक कंपनी के द्वारा 3 एकड़ में महुआ से बनी शराब बनाकर बस्तर का नाम देश विदेश में फैलाना है लेकिन बस्तर जो की आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और महुआ का काफी बड़ा श्रोत है यहां के आदिवासी नेता इस फैक्ट्री को अब राजनैतिक मुद्दा बनाकर पेश कर रहे है।बस्तर बायोटिक्स के फाउंडर सुभांक का कहना है की बस्तर में फैक्ट्री खुलने से यहां के ग्रामीणों को रोजगार मिलेगी,फैक्ट्री में उपयोग में आए जाने वाले अपडेटेड मशीनों का उपयोग किया जाएगा और पर्यावरण को मद्देनजर रखते हुए फैक्ट्री का संचालन किया जाएगा।

सर्व आदिवासी समाज कर रहा विरोध

वहीं सर्व आदिवासी समाज के महिला प्रभाग की प्रदेश अध्यक्ष रूखमणी कर्मा का कहना है की शराब फैक्टी के कई दुष्प्रभाव है रूखमणी कर्मा का कहना है कुछ सरकारी कर्मचारी गांव के भोले भाली ग्रामीणों को बरगलाकर अपना काम निकलवाना चाहते है।

*एक दिन पहले जनसुनवाई,तो आज प्रेस कांफ्रेंस*
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को ग्रामीणों द्वारा जनसुनवाई रखी गई थी जहां देखा गया की ग्रामीण फैक्ट्री के संचालन के लिए मान गए थे लेकिन बाद में आदिवासी नेताओं के कहने पर वापस से फैक्ट्री का विरोध होने लगा जिसे देखते हुए फैक्ट्री संचालकों ने मीडिया से बात की और फैक्ट्री को लेकर सभी अफवाहों को निराधार बताया।

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