निर्दोष आदिवासियों की निर्मम हत्या, घटनाओं को स्मरण कर भावुक हुए मंत्री केदार कश्यप

Chhattisgarh

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने कई दशकों से उत्पात मचा रखा है। इसकी पीड़ा बस्तर के भोले भाले आदिवासियों को सहन करनी पड़ी है। झूठे आरोप लगाकर आदिवासियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। जिसे याद कर हर कोई भी सिहर उठता है। अपनों की हत्या का मंजर याद कर आंखें नम हो जाती है। दिल भर आता है।

जगदलपुर के बस्तर टाउन हॉल में वन मंत्री केदार कश्यप आदिवासी भाइयों की नक्सलियों द्वारा निर्मम हत्या की घटना को स्मरण कर भावुक हो गए। उनका गला भर आया। उन्होंने कहा कि, मैं उन हिंसक घटनाओं को याद नहीं करना चाहता। बस्तर में ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए।

जो पीड़ा बस्तर को झेलनी पड़ी, वो पीड़ा आने वाली पीढ़ी को न सहना पड़े। हत्या की इतनी विभत्स घटना अपनी जीवन में कभी नहीं देखा था। आज भी वो मंजर याद आता है। आदिवासी भाइयों के चेहरे याद आते हैं, उनके परिवारों के चेहरे दिखाई देते हैं।

वन मंत्री ने कहा कि, नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से बस्तर के गांवों में विकास पहुंचाई जा रही है। पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। नक्सली हिड़मा के गांव में भी अस्पताल खुल गया है।

बता दें कि, जगदलपुर में बस्तर शांति समिति द्वारा लोकतंत्र बनाम माओवाद (थ्येन आनमन की विरासत का बोझ) संगोष्ठी आयोजित की गई। संगोष्ठी में वन मंत्री केदार कश्यप शामिल हुए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा  एवं प्रसिद्ध लेखक राजीव रंजन प्रसाद  उपस्थित रहे।

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