बोर्ड परीक्षाओं में दिव्यांग बच्चों के हौसलों की जीत दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय मठपुरैना का दसवी बोर्ड में 96 प्रतिशत और बारहवीं बोर्ड में 94 प्रतिशत रहा परीक्षा परिणाम

Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ : रायपुर, 10 मई 2019 मेहनत और हौसले से हर मंजिल आसान हो जाती है, यह साबित किया है। मठपुरैना के दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय के दिव्यांग विद्यार्थियों ने। राज्य शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस स्कूल में पढ़ने वाले दिव्यांग छात्र-छात्राओं का छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की हायर सेकेण्डरी स्कूल (12 वीं बोर्ड) परीक्षा में 94.1 प्रतिशत और हाईस्कूल (10 वीं बोर्ड) परीक्षा में 96.1 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा।इस स्कूल में कक्षा बारहवीं में 27 दृष्टिबाधित और 8 श्रवण बाधित कुल 35 बच्चे पढ़ते है। इनमें से 18 बच्चों ने प्रथम श्रेणी और 14 बच्चों ने द्वितीय श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण की है। इसी तरह कक्षा दसवीं में 15 दृष्टिबाधित और 12 श्रवण बाधित कुल 27 बच्चे पढ़ते है। इनमें से 23 बच्चों ने प्रथम श्रेणी और 2 बच्चों ने द्वितीय श्रेणी में परीक्षा उत्तीर्ण की है। इन दिव्यांग बच्चों में से 12 वीं बोर्ड परीक्षा में 84.2 प्रतिशत अंक लेकर दृष्टिबाधित जीत चंद्राकर, प्रथम 79 प्रतिशत अंक लेकर चांदनी सिन्हा द्वितीय और 77.8 प्रतिशत अंक लेकर  निर्मला पाल तृतीय स्थान पर रहीं। 10 वीं बोर्ड परीक्षा में दृष्टिबाधित विजय कुमार टंडन ने 84.17 प्रतिशत अंक लेकर प्रथम स्थान, गिरिजा शंकर ने 74.4 प्रतिशत अंक लेकर द्वितीय स्थान और  फूलसाय साहू ने 73.4 प्रतिशत अंक लेकर तृतीय स्थान प्राप्त किया है। 84.2 प्रतिशत अंक अर्जित करने वाले दिव्यांग जीत चंद्राकर ने अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के शिक्षकों और अपने माता-पिता को देते हुए कहा कि मेहनत आगे कोई भी लक्ष्य कठिन नहीं हो सकता, हौसले से हर मंजिल पाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि आगे वे सिविल सर्विसेस में जाना चाहते है। जीत के पिता  रामनाथ चंद्राकर शिक्षक हैं। उन्होंने बताया कि गांव के स्कूल में जीत को प्राथमिक पढ़ाई के लिए भर्ती किया था, लेकिन जीत को दिखाई ना पड़ने से पढ़ाई में दिक्कत होती थी। उन्हें मठपुरैना के दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय के बारे में पता चलने पर जीत का दाखिला वहां करा दिया। स्कूल में दाखिले के बाद उचित मार्गदर्शन और व्यवस्था के कारण जीत ने 12 वीं बोर्ड की परीक्षा अच्छे अंकों से पास की। इन बच्चों ने यह साबित कर दिया है कि उनके सामने हर चुनौतियां छोटी हैं और उन्होंने अपने सफलता के लिए शारीरिक कमी को आड़े नहीं आने दिया है। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और हौसले से यह सफलता पाई है।

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