रायपुर : आरक्षण विधेयक को लेकर छत्तीसगढ़ में राजनीति बयान जारी, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और राज्यपाल आमने सामने। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्यपाल खुद अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है । जो बिल विधानसभा से पारित हुआ है सरकार से पूछने का उन्हें अधिकार ही नहीं है, उसी आधार पर कोर्ट गए हैं, कोर्ट ने यह भी कहा है कि यह दुर्भाग्य जनक है , कोर्ट ने जब नोटिस दिया है, तो कोर्ट में जवाब देना चाहिए । कोर्ट के बाहर जवाब नही देना चाहिए । अपना पक्ष रखना चाहिए और वकील भी लगा रहे तो राज्य सरकार से पूछ कर ही लगाएगी क्योंकि हमारी सरकार की सलाह से ही राज्यपाल काम करती है।
हाईकोर्ट द्वारा राज्यपाल के सचिवालय को नोटिस जारी करने के मामले में राजभवन ने स्थिति स्पष्ट की है। राजभवन ने बताया है कि उन्हें हाई कोर्ट राज्यपाल को नोटिस जारी नहीं कर सकता। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला भी सामने रखा है। सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों की संविधान पीठ ने राष्ट्रपति व राज्यपाल को नोटिस जारी करने पर पूर्णतः रोक लगाई है। आरक्षण संशोधन विधेयक पर हाईकोर्ट में आज हुई सुनवाई के बाद राज्यपाल सचिवालय को हाईकोर्ट के द्वारा नोटिस जारी की गई थी। संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल को नोटिस जारी करने पर पूर्णतः रोक है,वह न्यायालय के प्रति जवाब देह नहीं है।
बता दें कि बिलासपुर हाई कोर्ट ने आरक्षण संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर न करने के मामले को लेकर दायर दो अलग-अलग याचिकाओं की सुनवाई करते हुए राज्यपाल अनुसुइया उईके को नोटिस जारी किया था । याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए जस्टिस रजनी दुबे की सिंगल बेंच ने राज्यपाल से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।