रायपुर : राज्योत्सव : राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव कल से शुरू हो चुका है और आज दूसरा दिन है।तेलंगाना से आए लोक कलाकारों ने दोहराया “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया।”
आज दोपहर तेलंगाना के लोक कलाकारों ने उसाड़ी नामक सुंदर नृत्य की प्रस्तुति देने के बाद बातचीत में कहा कि वे दूसरी बार छत्तीसगढ़ आए हैं और उन्हें अगर तीसरी बार भी आने का अवसर मिला तो वे जरूर आना चाहेंगे।इस नृत्य में 14 लोग शामिल होकर अपनी संस्कृति को संरक्षित करने और इसे नई पीढ़ी के लोगों को तक पहुंचाने का संकल्प लेते हैं।छत्तीसगढ़ के खाने के बारे जब पूछा गया तब उन्होंने कहा कि यहां का खाना अलग है पर जोरदार है। उन्हें बहुत मजा आया स्वादिष्ट भोजन कर के जिसे वे अपनी तेलंगाना में भी याद करेंगे।आगे नागेश, दत्तू और श्रीकांत ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकर ऐसा लग रहा है जैसे यहां एक नया तेलंगाना हमें मिल गया है।हम यहां भी अपनी संस्कृति, भाषा और कला को एक नए रूप में पाकर बेहद प्रसन्न है।एक खास बात जो तेलंगाना के कलाकारों ने कहा वह है कि छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार ने आदिवासी नृत्य के माध्यम से देश-विदेश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को जोड़ने का एक सुंदर प्रयास किया है।इस तरह आज आदिवासी नृत्य के खूबसूरत आयोजन से तेलंगाना की धरती आज छत्तीसगढ़ की धरती के साथ एकमेल हो रही थी जिसे देखकर दर्शक दीर्घा के लोगों ने एक ऐसे रोमांच का अनुभव किया जिसे वे हमेशा अपनी यादों में संजोए रखेंगे।