रेणु बोली – पार्टी को खत्म करने की साजिश पर धर्मजीत को किया निष्कासित

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रायपुर। छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस सुप्रीमो डॉ. रेणु जोगी ने विधायक धर्मजीत सिंह के पार्टी से निष्कासन पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा, यह मेरे राजनीतिक जीवन का सबसे दुखद पल है। पार्टी को खत्म करने की साजिश पर जिनको मैं अपना छोटा भाई मानती थी, उनको मेरे ही हाथों से निष्कासित करना पड़ा। उन्होंने पूरे घटनाक्रम के लिए भाजपा के ऑपरेशन लोटस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, मेरे और संभवत: अमित जोगी के जीवित रहते जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ का भाजपा में विलय नहीं होगा।

रेणु जोगी और अमित जोगी ने अपने निवास में संवाददाताओं से चर्चा में कहा, भाजपा ने ऑपरेशन लोटस से महाराष्ट्र में सत्ता हासिल की। वहां एकनाथ शिंदे को सीएम बनाया गया। स्व. अजीत जोगी के सपनों की पार्टी को महाराष्ट्र में शिवसेना, झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में क्षति पहुंचाने की कोशिश की। भाजपा द्वारा जोगी कांग्रेस का पार्टी में विलय करने का प्रयास किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में ऑपरेशन लोटस करने का प्रयास किया गया।
जेसीसीजे के खिलाफ हो रही साजिश
रेणु जोगी ने कहा, हमें सूत्रों से यह जानकारी मिली थी कि साजिश हो रही है। मुझे बिना जानकारी दिए 27 अगस्त को हमारे दल के प्रमुख नेता धर्मजीत सिंह केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम में शामिल हुए। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। मैं जब अस्पताल में भर्ती थी, दोनों विधायक दिल्ली में रहते हुए भी स्वास्थ्य की जानकारी नहीं लिए। ना ही मुझसे मिलने आए। भाजपा की पूर्व प्रभारी डी. पुरंदेश्वरी से मिलते रहे और साजिश करते रहे।
पार्टी को मिटाने का रचा षडयंत्र
रेणु जोगी ने कहा, पार्टी की विचारधारा के विरुद्ध जाकर पार्टी के विलय का बहुत बड़ा षड्यंत्र रचा गया। यह छत्तीसगढ़ की अस्मिता पर हमला है। जेसीसीजे छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जाति, जनजाति समाज के लोगों, पिछड़ों, गरीबों और असहाय लोगों की पार्टी है। हमें निष्कासन का यह कदम उठाना पड़ा क्योंकि हमें पार्टी को बचाना था। हमारे पास यही विकल्प था। मुझे मेरे भाई तुल्य धर्मजीत सिंह को निष्कासित करना पड़ा।
धर्मजीत के आरोपों पर अमित की सफाई
अमित जोगी ने धर्मजीत सिंह के आरोपों पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा, मेरी उनकी पत्नी से ऐसी कोई बात नहीं हुई। यह सब जानते हैं कि धर्मजीत सिंह फोन नहीं उठाते हैं। उनसे बात करने के लिए आंटी (धर्मजीत सिंह की पत्नी) को फोन लगाया जाता है। उस दिन भी ऐसे ही बात हुई थी। मेरी मां अस्पताल में पड़ी थीं। मुझे जानकारी मिली कि ये लोग क्या कर रहे हैं। उस समय भावना में आकर मैंने ये बातें कहीं। लेकिन यह कहना कि उनकी पत्नी को मैंने अपशब्द कहे, इसका तो प्रश्न ही नहीं उठता। हत्या की साजिश का आरोप भी झूठा है। इसका कोई प्रमाण है तो दे दें। प्रमोद शर्मा के पास इस्तीफा देने का विकल्प खुला है।

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