चीता प्रोजेक्ट को लेकर सियासी उबाल, कांग्रेस बोली- मोदी और भाजपा ने देश को गुमराह किया

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रायपुर :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर नामीबिया से लाए गए चीतों को मध्यप्रदेश के कूनो पार्क में छोड़ा, इसे लेकर सियासत शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने ट्वीट कर कहा, नोटबंदी की कतारों में लोग मरे। लॉकडाउन में सड़कों पर मजदूर मरे। कोरोना में लाखों परिवार उजड़ गए। हर 4 में से एक आत्महत्या करने वाला दिहाड़ी मजदूर है। देश में ज्यादातर आत्महत्या के मामले आर्थिक संकट के कारण हुए। यह सब नकारकर प्रधानमंत्री ने इस दौर को चीतों का अमृतकाल घोषित कर दिया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा, चीता भारत लाने का प्रोजेक्ट 50 साल पहले शुरू हुआ था। 1972 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लेकर आईं। उसके बाद आईएएस अधिकारी एमके रंजीत सिंह ने चीतों को बचाने एक प्रोजेक्ट पेश किया। उस समय चीते ईरान से लाने का दोनों देशों के बीच एग्रीमेंट हुआ। भारत को ईरान से चीते चाहिए थे और ईरान को भारत से शेर चाहिए थे। इस दौरान पाया गया कि ईरान में चीतों की संख्या तेजी से कम हो गई है। प्रोजेक्ट फिर अटक गया। उन्होंने कहा, 2008-09 में उन्होंने यूपीए सरकार में पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने एक कमेटी बनाई और रंजीत सिंह को इसका अध्यक्ष बनाया। अफ्रीकन चीता लाने के प्रस्ताव को 2010 में मनमोहन सरकार ने स्वीकृत किया। 2011 में भारत सरकार द्वारा 50 करोड़ रुपए चीतों के लिए दिए गए। सुप्रीम कोर्ट से चीता प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी तथा 2019 में सुप्रीम कोर्ट से रोक हटी, उसके बाद ही अब चीते भारत आ सके। मोदी एंड कंपनी ने सिर्फ अपना टैग लगाकर वाहवाही लेने और प्रचार करने का काम किया है।
पीएम को मानव सभ्यता से लगाव नहीं : भगत
खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने कहा, देश के प्रधानमंत्री का मानव जीवन, मानव सभ्यता के प्रति लगाव नहीं दिखता। अन्य जीव-जंतुओं को लेकर उनका लगाव अधिक दिखता है। वे वैराग्य की ओर जाने का रास्ता तय कर रहे हैं।

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