शराब में पानी मिला कर बेचे जाने पर रायगढ़ की प्लेसमेंट एजेंसी हटाई गई

Chhattisgarh

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में शराब में पानी मिलाकर बेचने और नकली शराब का मामला सामने आया। भाजपा विधायक नारायण चंदेल के सवाल पर आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने सदन को दिए जवाब में स्वीकार किया कि शराब में पानी मिलाने की शिकायत मिली थी। मंत्री ने बताया कि जांजगीर-चांपा में एक शिकायत मिली थी, वहां कार्रवाई हुई है। आबकारी विभाग के सब इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया है। रायगढ़ में भी पांच शिकायतें थीं। वहां प्लेसमेंट एजेंसी को हटा दिया गया है। वहां भी इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को निलंबित किया गया है। वहां आबकारी अधिकारी को शो-कॉज नोटिस दिया गया है। अगर संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो उनपर भी कार्रवाई होगी।
प्रश्नकाल में इसे लेकर नारायण चंदेल से सत्तापक्ष के विधायक पूछने लगे कि आपको इसका कैसे अनुभव है कि पानी मिलाया जा रहा है? चंदेल ने इस पर कहा, होली में हमसे कुछ लोग मिलने आए थे। उन्होंने कहा कि शराब पीने के बाद आजकल चढ़ता नहीं है। नारायण चंदेल ने कहा, झारखंड, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों से अवैध शराब राज्य में खपाई जा रही है। अवैध शराब मामले में कई लोग पकड़े गए, लेकिन बगैर जुर्म दर्ज किए छोड़ दिया गया। आबकारी मंत्री ने इस पर कहा, जहां-जहां से शिकायतें आती हैं, वहां कार्रवाई करते हैं। विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा, शराब में मिलावट की जांच की क्या व्यवस्था है। किस स्तर का अधिकारी जांच करता है? आबकारी मंत्री की जगह मो. अकबर ने बताया, विभाग के पास इसकी जांच के लिए प्रयोगशाला है। हाइड्रोमीटर की मदद से मौके पर भी जांच की जाती है। वे अजय चंद्राकर के पूरक सवाल का जवाब नहीं दे पाए कि शराब में पानी की जांच का क्या तरीका है।
अंग्रेजी बाेलने लगे तो ओरिजनल
सवाल को लेकर दाेनों पक्षों के बीच चर्चा के दौरान मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, विपक्ष के लोग शराब के प्रश्न पर इतना मदमस्त क्यों हो गए हैं। उन्होंने चुटकी ली कि शराब की गुणवत्ता को परखने का कोई सिस्टम नहीं है। इससे समझ जाना चाहिए कि अगर पीने के बाद कोई अंग्रेजी बोलने लगे तो समझो कि ओरिजनल है।
शराब दुकानों में दो पेटी
भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने कहा कि सभी शराब दुकानों में शराब की दो अलग-अलग पेटी रखी जाती है। एक पेटी परमिट वाली होती है और दूसरी पेटी बगैर परमिट वाली। 25 फीसदी परमिट की शराब और 75 फीसदी बगैर परमिट की शराब बेची जा रही है।
बिलासपुर से गाैरेला-पेड्रा की दुकानों का संचालन
भाजपा विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि गौरेला पेंड्रा जिला बने दो साल हो गए हैं, लेकिन शराब दुकानों का संचालन बिलासपुर से हो रहा है। ऐसे में जिला बनाने का क्या औचित्य? बॉर्डर का जिला है। वहां अमला नहीं बैठेगा तो अवैध शराब की तस्करी बढ़ सकती है। मंत्री मो. अकबर ने कहा कि विभागीय सेटअप बैठेगा तो संचालन उसी जिले से शुरू हो जाएगा।

 

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