रायपुर : सरकार का उसना चावल पर जोर क्यों! खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा छत्तीसगढ़ के स्थानीय खान-पान में उसना चावल शामिल नहीं है। केंद्रीय मांग को पूरा करने के लिए ही प्रदेश में 416 राइस मिले उसना चावल बना रही हैं। इनकी क्षमता 5.93 लाख टन है। प्रदेश में खरीदे गए कुछ पतले एवं मोटे किस्म के धान की केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित स्पेशिफिकेशन अनुसार अरवा मिलिंग नहीं हो पाती है। ऐसे में उनको उसना राइस मिलों में ही भेजा जाता है। सरकार इस साल 105 लाख मीट्रिक टन धान ले रही है। अनुमान है कि इससे 71 लाख मीट्रिक टन चावल बनेगा। राज्य में सरकारी राशन दुकानों के लिए सालाना 24 लाख मीट्रिक टन चावल लगता है। यह भारतीय खाद्य निगम में जमा होता है। अब सरकार 23 लाख टन उसना चावल को भी केन्द्रीय पूल में लिए जाने का अनुरोध कर रही है।