रायपुर : छत्तीसगढ़ में आगामी 1 दिसंबर से धान खरीदी शुरू होने वाली है। पूर्व में सहकारी समितियों द्वारा सरकार से की गई पांच सूत्रीय मांगों को अब तक पूरा नहीं किया गया है। जुलाई माह में सहकारी समितियों के कर्मचारियों ने तालाबंदी कर पूरे प्रदेश में आंदोलन किया था। आंदोलन के दौरान किसानों को खाद वितरण भी प्रभावित हुआ था। सहकारिता मंत्री डाॅ. प्रेमसाय सिंह टेकाम और पंजीयक सहकारी समिति ने उनकी मांगों पर एक माह में निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। चार माह बाद उनकी पांच सूत्रीय मांगों पर निर्णय नहीं लिए जाने पर समिति के कर्मचारी एक बार फिर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सहकारी कर्मचारी संघ के बैनर तले प्रदेश की 2058 समितियों ने अपनी मांगों की ओर ध्यानाकर्षण करने 8 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। समिति के प्रदेश अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने बताया कि जुलाई माह में किए गए आंदोलन के दौरान राज्य सरकार ने सभी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर एक माह में निर्णय लेने की बात कही थी। 1 दिसंबर से धान खरीदी की तिथि की घोषणा के बाद भी अब तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। विभाग की ओर से इस संबंध में जानकारी नहीं दी जा रही है। समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ता रायपुर पहुंचकर बूढ़ातालाब में अनिश्चितकालीन धरना देंगे। बताया गया है कि सहकारी समिति के कर्मचारियों ने कैबिनेट की उपसमिति को अपने मांगों के संबंध में सुझाव भी दिए थे। सुझाव के बाद अब तक सरकार की ओर से इसे पूरा करने के संबंध में कदम नहीं उठाने से कर्मचारी नाराज हैं।
ये हैं मांगें
समितियों द्वारा धान शार्टेज संबंधी मांग प्रमुख है। राज्य शासन ने समितियों में सूखत के संबंध में एक समिति बनाकर इसका निराकरण करने का आश्वासन दिया था। अब तक इस मामले में शासन की ओर से कोई निराकरण नहीं करने से समितियों को बड़े घाटे की संभावना है। बताया जाता है कि कई उपार्जन केंद्रों में अब तक धान का पूरा उठाव भी नहीं हो पाया है। अन्य मांगों में सेवा नियम की कुछ कंडिकाओं में बदलाव, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में शत-प्रतिशत भर्ती, घाटे में चल रही समितियों के कर्मचारियों के लिए वेतन प्रावधान और धान खरीदी नीति के कुछ प्रावधानों में बदलाव के मांग शामिल है।