जमराव उत्खनन से मिल रहे प्राचीन ग्राम्य संस्कृति के प्रमाण

Chhattisgarh

रायपुर : रायपुर पुरातत्व की बड़ी उपलब्धि, जमराव उत्खनन से मिल रहे प्राचीन ग्राम्य संस्कृति के प्रमाण।

संस्कृति विभाग द्वारा दुर्ग जिले के पाटन तहसील में खारून नदी किनारे जमराव स्थित प्राचीन टीलों पर वर्ष 2018-19 और 2020-21 में पुरातत्त्वीय उत्खनन कराया गया है। उत्खनन से यहाँ लगभग दो हजार वर्ष पुराने गांव के बसाहट के अवशेष मिल रहे हैं। उपलब्ध प्राचीन पुरावस्तुओं से ज्ञात होता है कि यह खारून नदी द्वारा तरीघाट से जुड़े व्यापार मार्ग में स्थित एक महत्वपूर्ण गांव कारीगरों की बस्ती थी। प्राचीन बसाहट के अवषेष और पुरावस्तुएं इतिहास के विभिन्न कालखण्डों (मौर्योत्तर काल से गुप्तोत्तर काल तक) के मिले हैं जिनका प्रथम दृष्टया काल निर्धारण प्रथम सदी ईसा पूर्व से 6वीं सदी ईसवी तक किया जा सकता है। प्राचीन बस्ती के भग्नावषेषों और उत्खनन के दौरान प्राप्त पुरावस्तुओं से तत्कालीन ग्रामीण संस्कृति के विभिन्न पहलुओं की जानकारी सामने आ रही है। इस वर्ष के उत्खनन में सबसे निचले स्तर से ब्लैक आन रेड वेयर (बी.आर.डब्ल्यू.) संस्कृति के पात्र-परम्परा सहित अस्थियों के अवषेष भी प्राप्त हुए हैं जिनका वैज्ञानिक परीक्षण और इस स्तर से मिले चारकोल सैम्पल के कार्बन-14 तिथि निर्धारण से जमराव की प्राचीनता और सुदूर अतीत में जाने की संभावना है। खुदाई में मिले लोहे और कांच के गलन अपषिष्ट, कुंभकार के आंवा जैसे साक्ष्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से लेकर पूर्व मध्यकाल तक जमराव षिल्पकारों/कर्मकारों (लोहार कुम्हार कांच की चुड़ियाँ बनाने वाले कारीगर आदि) की एक सम्पन्न बस्ती थी। उत्खनन से प्राप्त एकमुख लिंग लज्जा गौरी कुबेर बलराम-संकर्षण की मूर्तियों और मातृदेवी यक्ष-यक्षी की मृण्मूर्तियों से वहाँ निवासरत तत्कालीन षिल्पियों के धार्मिक आस्था और उपासना पद्धति का ज्ञान होता है। कुषाणकालीन तांबे के गोल सिक्कों सहित छत्तीसगढ़ के गज प्रतीक वाले स्थानीय वर्गाकार तांबे के सिक्के बाट-तौल भी मिले हैं जो व्यापारिक गतिविधियों के प्रमाण हैं। तत्कालीन लोगों के आभूषण जैसे टेराकोटा, कांच, शंख और अर्ध बहूमूल्य पत्थरों से बने मनके और चूड़ियाँ धातु (तांबा) निर्मित छल्ले और चूड़ियां भी मिली हैं, जो तत्कालीन लोगों के आर्थिक जीवन स्तर का संकेत करती हैं। जमराव में उत्खनन कार्य संचालक श्री विवेक आचार्य के मार्गदर्षन और डाॅ. पी.सी. पारख के निर्देषन में सम्पन्न कराया जा रहा है।

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