*कोरोना ने छीना पिता का साया* *अस्पताल में नौकरी कर बेटी ने संभाला परिवार का जिम्मा*

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बेटियां बेटों से कम नहीं होती है यह कहावत एक बेटी ने सिद्ध कर दी है तथा पिता की मौत के बाद तीन भाइयों तथा मां कि सहारा बनी है। कोरोनावायरस का संक्रमण बेरहमी के साथ लोगों की जिंदगियां लील रहा है एक के बाद एक परिवार उजड़ते जा रहे है इसी तरह एक दिन इस बेटी के पिता की कोरोना में मौत हो गई और पिता का साया उठ गया तीन भाई है जो पूजा से छोटे हैं। सीधी के जिला चिकित्सालय कोविड आईसीयू वार्ड में तैनात नर्स पूजा पनिका ने हिम्मत नहीं हारी और पिता की मौत के तीसरे दिन ही कलेक्टर रवींद्र चौधरी की मदद से जिला चिकित्सालय के कोविड-19 वार्ड में स्टाफ नर्स के पद पर जॉइनिंग कर ली वही अब परिवार की तरह कोविड पॉजीटिव मरीज की सेवा कर रही है।

कलेक्टर सीएमएचओ की अभिनव पहल

जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर स्थित कुसमी की रहने वाली पूजा पनिका जिनके पिता स्वर्गीय प्रयाग लाल पनिका शिक्षक थे ओर उनका सपना था कि हमारी बेटी नर्स बने और मरीजों की मन से सेवा करें। बेटी को नर्स तो बना दिए बिटिया जीएनएम करने के बाद आईसीयू की ट्रेनिंग लेकर जबलपुर में अपनी सेवा भी देने लगी इसी दरमियान अचानक पिता की तबीयत खराब हुई आनन-फानन में परिजनों की मदद से जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया इस दरमियान बेटी को कुछ नहीं पता था छोटे भाई की मदद से बेटी पूजा को अचानक मोबाइल के माध्यम से पता चला कि पिता की तबीयत खराब है जहां आनन-फानन में टैक्सी कर लॉकडाउन में ही सीधी के जिला चिकित्सालय में पहुंची इस दरमियान पिता की हालत खराब होती जा रही थी और आखरी में अस्पताल के आईसीयू वार्ड में पिता ने दम तोड़ दिया। मामले की पूरी जानकारी मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी बीएल मिश्रा के माध्यम से कलेक्टर को लगी जहां जिले की जिम्मेदार अधिकारी बेटी की मदद करने के लिए आगे आए और कलेक्टर के निर्देशानुसार सीएमएचओ ने इस बहादुर बेटी को सीधी में ही स्टाफ नर्स के पद पर नियुक्ति कर दी है। स्टार समाचार से बातचीत में पूजा ने बताया की अब तो आत्मविश्वास टूट चुका था कि कैसे क्या होगा क्योंकि अब तो पिता का साया भी उठ गया है लेकिन जिले के कलेक्टर एवं सीएमएचओ के अभिनव पहल से आज ये बिटिया अपने पैर में खड़ी है और अपने परिवार की रीड की हड्डी बनी हुई है।

सेवा के साथ परिवार की जिम्म्मे्दारी

 

अब जिले की यह बहादुर बेटी जिला चिकित्सालय में अपनी सेवा दे रही है और अपने पिता की मौत के बाद तीन छोटे भाइयों तथा मां का ख्याल रख रही है जो लोग बेटियों को बोझ समझते हैं उनके लिए एक सीख है की बेटी है तो कल है। ऐसी होनहार बिटिया को हमारी मीडिया टीम सेल्यूट करती है।

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