नसबंदी के लिए बुलाई गई महिलाओं के ख़िलाफ़ ही अपराध दर्ज कराना बेहद शर्मनाक आचरण : भाजपा

Chhattisgarh

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत ने जशपुरनगर में नसबंदी के लिए सौ-सौ किलोमीटर दूर से बुलाई गई महिलाओं को भूखे-प्यासे रखकर बैरंग लौटाने के मामले में पीड़ित महिलाओं के ख़िलाफ़ ही अपराध दर्ज किए जाने को लेकर प्रदेश सरकार और उसकी प्रशासनिक मशीनरी पर तीखा हमला बोला है। श्रीमती राजपूत ने कहा कि इस मामले ने एक बार फिर प्रदेश सरकार के महिला विरोधी चरित्र को बेनक़ाब कर दिया है जिसकी नाक के नीचे स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा नसबंदी के लिए बुलाई गई महिलाओं के साथ इस तरह का शर्मनाक व्यवहार किया गया।

भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती राजपूत ने हैरत जताई कि नसबंदी के लिए बुलाई गई इन महिलाओं को एत तो 12 घंटे सेभी ज़्यादा वक़्त तक भूखा-प्यासा रखा गया और बाद में उन्हें बैरंग लौटाया जा रहा था। मितानिनों और परिजनों के साथ पहुँचीं ये महिलाएँ इन अव्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर आवास पर धरना पर बैठ गईं जिन्हें संतोषजनक ज़वाब देकर स्थिति पर क़ाबू पाने में प्रशासन के अधिकारी नाकामयाब रहे और फिर अपने अधिकारी होने का रुतबा दिखाकर इन पीड़ित महिलाओं के ख़िलाफ़ ही कोरोना संक्रमण की आड़ लेकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बात कहते हुए महामारी एक्ट की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज करा दिया! श्रीमती राजपूत ने कहा कि क़दम-क़दम पर कोरोना गाइडलाइन की धज्जियाँ उड़ाती प्रदेश सरकार और उसकी नौकरशाही कोरोना संक्रमण की आड़ लेकर नसबंदी शिविर के लिए बुलाई गईं महिलाओं के साथ इस तरह का बर्ताव न केवल अपमानपूर्ण, अपितु आपत्तिजनक है।  राजपूत ने कहा कि प्रशासन ने नसबंदी के लिए बुलाई गई महिलाओं के खान-पान के इंतज़ाम में अपने नाकारापन को ढँकने के लिए जिस तरह महिला-शक्ति को प्रताड़ित करने का काम किया है, उसकी भाजपा महिला मोर्चा घोर निंदा करता है और प्रदेश सरकार से मोर्चा मांग करता है कि प्रदेश सरकार महिलाओं के साथ हुई इस ज़्यादती के लिए पूरे प्रदेश की महिलाओं से नि:शर्त क्षमायाचना करे और उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामला तत्काल वापस ले, अन्यथा महिला मोर्चा महिलाओं के स्वाभिमान की रक्षा की लड़ाई लड़ने सड़क पर उतरेगा। इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मोग कर श्रीमती राजपूत ने कहा कि अगर कोरोना संक्रमण को लेकर अधिकारी इतने ही संज़ीदा थे तो फिर सौ-सौ किलोमीटर से इन महिलाओं को नसबंदी कराने शिविर में बुलाया ही क्यों गया था?

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