किसान संतुलित मात्रा में उर्वरको का करें उपयोग… किसान समस्या समाधान के लिए टोल फ्री नं. 18002331850 पर करे सम्पर्क

Chhattisgarh

चित्रा पटेल : रायपुर : दिनांक26 अगस्त 2020/कलेक्टर डॉ एस. भारतीदासन ने वर्तमान में किसानों द्वारा खेती के लिए उपयोग किये जाने वाले उर्वरक का आवश्यकतानुसार वितरण करने के निर्देश दिए है।उन्होंने कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है,इसके वितरण में अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई किया जाएगा।

उपसंचालक कृषि आर. एल.खरे ने बताया कि पौधों के वृद्धि एवं विकास हेतु कुल 16 तत्व आवश्यक होते है. इनमें तीन प्राथमिक तत्व कार्बन, हाईड्रोजन व आक्सीजन तीन मुख्य पोषक तत्व नाइट्रोजन, स्फूर, पोटाश है एवं तीन गौण तत्व कैल्शियम, मैग्निशियम व सल्फर है अन्य सात सूक्ष्म तत्व-लोहा, जस्ता, कापर, बोरान, मैग्नीज, कोबाल्ट, नीकल है जो पौधों के लिए अनवार्य है। यहां यह बात उल्लेखनीय है इन पोषक तत्वों की आवश्यकता कम-ज्यादा मात्रा में जरूरत होती है।अतः विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में ली जाने वाली फसलों हेतु आवश्यकतानुसार पोषक तत्वों की जानकारी मिट्टी परीक्षण के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है। जिस प्रकार मलेरिया जैसे संक्रामक रोग से उपचार हेतु खून की जांच कराई जाती है उसी प्रकार धान की फसल में खैरा नामक रोग जिंक तत्व की कमी से होती है। इसकी जानकारी मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही हो सकता है।इसको दूर करने हेतु 25 कि.ग्रा. प्रति हेक्टर दर से उपयोग करना चाहिए।
मिट्टी की अम्लीयता एवं क्षारियता पी.एच से मापी जाती है। मिट्टी का पी.एच. मान 7 से कम होने पर अम्लीय माना जाता है, सामान्यतः अम्लीय भूमि में चूना का उपयोग 2-2.5 टन प्रति हेक्ट. तक अथवा मानक गणना दर अनुसार चाहिए तथा मिट्टी का पी.एच. मान 7 से अधिक होने पर क्षारीय माना जाता है, सामान्यत. क्षारीय मिट्टियों में जिप्सम 2.5 क्विं. प्रति हेक्टर अथवा मानक गणना दर अनुसार उपयोग करना लाभप्रद होता है। इसी प्रकार अन्य पोषक तत्व जैसे नत्रजन, स्फूर व पोटाश की मिट्टी में उपलब्ध मात्रा ज्ञात कर बोयी जाने वाली फसलों के अनुसार खाद व उर्वरकों की संतुलित मात्रा में अनुशंसानुसार उपयोग करना चाहिए। सामान्यत मिट्टी परीक्षण का परिणाम तत्वों की उपलब्धता अतिअल्प, कम, मध्यम व उच्च में दिया जाता है। तत्व की उपलब्धता का परिणाम अतिअल्प होने की स्थिति में फसलों के लिए उर्वरक की अनुशंसित मात्रा में डेढ़ गुना उपयोग किया जाना चाहिए। तत्व की उपलब्धता कम होने की स्थिति में फसलों के लिए उर्वरक की अनुशंसित मात्रा से सवा गुना उपयोग किया जाना चाहिए। मध्यम होने की स्थिति में अनुशंसित मात्रा के बराबर व उच्च होने की स्थिति में अनुशंसित मात्रा में आधा उपयोग किया जाना चाहिए।
जिले में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक उर्वरक उपलब्ध कराया गया है।जिले में 59 हजार 2 सौ मि.टन मांग के विरूद्ध 72 हजार 3 सौ मि.टन जिसमें यूरिया 31 हजार मि.टन, डी.ए.पी. 26 हजार 5 सौ मि. टन, पोटाश 5 हजार 2 सौ मि.टन, सिंगल सुपर फास्फेट 4 हजार 9 सौ मि.टन, एन.पी.के. 4 हजार 5 सौ मि. टन का भंडारण किया गया है, इसमें से यूरिया 28 हजार 1 सौ मि.टन. डी.ए.पी. 19 हजार 4 सौ मि.टन, पोटाश 4 हजार 2 सौ मि.टन, सिंगल सुपर फास्फेट 4 हजार 7 सौ मि.टन, एन.पी.के. 4 हजार 4 सौ मि.टन का वितरण हो चुका है, इस प्रकार 61 हजार मि.टन अर्थात् मांग की तुलना में 112 प्रतिशत उर्वरक का वितरण हो चुका है।
उन्होंने बताया कि यूरिया प्रति बोरी 266रुपए,- डी.ए.पी. 1175 रुपए, पोटाश 919 रुपए सिंगल सुपर फास्फेट 340 रुपए, सिंगल सुपर फास्फेट दानेदार 370 रुपए,सिंगल सुपर फास्फेट जिंककेटेड 355 रुपए,एन.पी.के. (12रू32रू16) 1125 रुपए की दर पर उपलब्ध है। उर्वरक का विक्रय मूल्य बोरी पर अंकित मूल्य अनुसार क्रय किया जा सकता है।
उन्होंने किसान भाईयों से अनुरोध किया है कि उर्वरक के उठाव में किसी भी प्रकार की समस्या आने पर क्षेत्रीय कृषि अधिकारी अथवा किसान हेल्प लाईन टोल फ्री नं. 18002331850 जिला रायपुर से संपर्क करें।

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