इंदौर : निजी स्कूलों द्वारा ट्यूशन फीस के नाम पर मांगी जा रही स्कूल फीस को अनुचित बताते हुए जागो पालक जागो संगठन के सदस्यों द्वारा उच्च न्यायालय की जबलपुर बेंच में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में राज्य शासन, सीबीएसई बोर्ड, एसोसिएशन ऑफ अनएडेड सीबीएसई स्कूल के साथ आईसीएसई बोर्ड को भी पक्षकार बनाया गया है।
उल्लेखनीय है कि स्कूल फीस को लेकर पूर्व में जो भी याचिकाएं न्यायालय में लगाई गई हैं, उनमें आईसीएसई बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया था।
अधिवक्ता अभिनव मल्होत्रा और चंचल गुप्ता के माध्यम से लगी इस याचिका के अनुसार शासन द्वारा स्कूलों को पूर्व की तरह ट्यूशन फीस वसूलने की जो छूट दी गई है वह न्यायोचित नहीं है, क्योंकि अधिकांश स्कूलों द्वारा ली जाने वाली पूरी फीस ट्यूशन फीस के नाम पर ही वसूली जाती है। इसमें स्कूलों द्वारा कई अन्य तरह की सुविधाएं भी दी जाती है और वर्तमान में स्कूल बंद रहने से स्कूलों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही है। ऐसे में छात्रों को वह सब सुविधाएं नहीं मिल रही है जो नियमित रूप से स्कूल जाने के दौरान उन्हें मिलती थी। इससे स्कूलों के खर्च में भी भारी कटौती आई है, वहीं दूसरी और पालकों पर ऑनलाइन पढ़ाई के संसाधन जुटाने के लिए अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। इसके बावजूद बच्चों को पढ़ाई का वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है।
फीस निर्धारण के लिए बने कमेटी
याचिका में मांग की गई है कि उच्च न्यायालय अपनी निगरानी में एक कमेटी का गठन किया जाए। जो स्कूलों द्वारा वर्तमान में करवाई जा रही ऑनलाइन पढ़ाई में लगने वाले वास्तविक खर्च और अन्य सभी तथ्यों जैसे लॉक डाउन के कारण उपजे आर्थिक संकट इत्यादि को ध्यान में रखते हुए उचित ट्यूशन फीस का निर्धारण करें।
5 वीं तक न हो ऑनलाइन पढ़ाई
याचिका में यह भी मांग की गई है कि पांचवी तक की ऑनलाइन कक्षाओं पर रोक लगाने का जो आदेश शासन द्वारा जारी किया गया है उसे निरस्त कर पांचवी कक्षा तक की ऑनलाइन पढ़ाई पर फिर से रोक लगाई जाए।
फीस के कारण बन्द नहीं कि जाए ऑनलाइन पढ़ाई
याचिका में अंतरिम मांग की गई है कि फीस जमा होने से बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई बंद नहीं किए जाने संबंधित आदेश भी स्कूलों को जारी किए जाएं।
याचिकाकर्ता का नाम इस तरह से..सचिनमाहेश्वरी,दीपक शर्मा, देव खुबानी, विशाल प्रेमी, धीरज हसीजा,प्रतीकतागड़, मनोज मालवीय, अधिवक्ता चंचल गुप्ता, सतीश शर्मा, जागो पालक जागो संगठन सामिल है।