भूपेश सरकार की पीडीएस व्यवस्था को पलीता लगा रहे संचालक..कोरोना से पहले पेट की भूख मार डालेगी सरकार

Chhattisgarh

ईश्वर सोनी : बीजापुर :छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल के द्वारा घोषणा की गई थी कि पूरे छत्तीसगढ़ में अप्रैल- मई दो महीनों का पीडीएस चावल एक मुश्त प्रत्येक परिवारों को दिया जाएगा परंतु उनके आदेश केवल खोखले साबित नजर आ रहे हैं।

बीजापुर जिले के पेद्दाकोरमा ग्राम पंचायत के पेद्दाकोरमा – काके कोरमा , बोड़ला पुसनार – मुनगा के 400 से ज्यादा परिवार लॉक डाउन के चलते दाने दाने को मोहताज , इन गांवों में सोसायटी से मिलने वाले चावल को भी संचालक दसरू द्वारा कम मात्रा में दिया जा रहा है पेद्दाकोरमा के ग्रामीण बुधरी ने बताया कि जब वो राशन लेने 12 किलोमीटर चलकर पामलवाया गई तो सोसायटी संचालक द्वारा मात्र 20 किलो चावल ही दिया गया वंही आयतु माड़वी ने बताया कि उसे भी राशन कार्ड में 20 किलो ही चावल दिया गया और जब उसने कहा कि इतना कम चावल क्यो तो संचालक ने कहा कि लॉक डाउन के चलते शासन से राशन कम आया है और चाहिए तो दो दिन बाद आ जाना जिस पर जब वो दो दिन बाद वापस गया तो उसे 50 किलो चावल और दिया गया लेकिन उसके 500रुपये लिए गए उसी तरह ग्रामीण कल्लू पिता बुच्चा को भी 50 किलो चावल के बदले 350 रुपये मांगे गए जिस पर उसने 350रुपये देकर चावल खरीदा इसी तरह गांवों के ग्रामीणों ने सोसायटी संचालक दशरू मोडियाम पर राशन कार्ड से चावल कम देने और बाद में उनका चावल उनको ही बेचने का आरोप लगाया वंही लॉक डाउन के चलते ग्रामीण तेल – आलू – प्याज , मिर्ची लेने भी बीजापुर नही आ पा रहे है और सचिव द्वारा भी शासन से मिलने वाली किसी तरह की राहत सामग्री – मास्क -सेनेटाइजर – साबुन गांवों में अब तक नही पंहुचाई गई जिसके चलते ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है

मंगली मोडियम , कोरसा सन्नी , माड़वी हूंगा , चिका सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि सोसायटी संचालक दशरू मोडियाम ने उनके राशन कार्ड को भी अपने पास रख लिया है ओर राशन लेने जाने पर उसमे क्या इंट्री करता है हमे नही मालूम और पिछले डेढ़ साल से केरोसिन भी नही दिया गया है।

इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासन की योजनाएं कितने कागजों में चल रही है इन दिनों कोरोना का संक्रमण फैला हुआ है जिसे कारण समूचे देश भर में लॉक डाउन कर दिया गया है जिसके चलते साप्ताहिक बाजारे भी बन्द है यंहा के ग्रामीणों को रोजमर्रा की रोजमर्रा खाने पीने की सामग्री के लिए बाजार के भरोसे रहना पड़ता है लेकिन अब उनकी रोजमर्रा खाने पीने की सामग्री की पूर्ति बाजार बंद के चलते नही हो पा रही है

जिला मुख्यालय में पुलिस के भय के चलते आने से कतराते है ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग रोजमर्रा की रोजमर्रा खाने पीने की  सामग्री लेने बीजापुर भी नही जा सकते क्योंकि वँहा भी पुलिस द्वारा हमेशा नक्सली समझ कर जबरन पकड़ने ओर प्रताड़ित करने का भय बना रहता है

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