सशस्‍त्र बल झण्‍डा दिवस.. सैनिकों के परिजनों के प्रति नागरिक एकजुटता प्रदर्शित करने का दिन : एयर कमांडो अविनाश कुलकर्णी

Chhattisgarh

रायपुर : दिनांक 07दिसम्बर 2019, सशस्त्र बल झंडा दिवस जांबाज सैनिकों व उनके परिजनों के प्रति नागरिक एकजुटता प्रदर्शित करने के उद्देश्‍य से हर साल 7 दिसंबर को पूरे देश में मनाया जाता है । खासतौर से भारत की तीनों सेनाओं में यह दिन विशेष रूप से मनाया जाता है । 23 अगस्त 1947 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की रक्षा समिति ने युद्ध दिग्गजों और उनके परिजनों के कल्याण के लिए सात दिसंबर को झंडा दिवस मनाने का फैसला लिया था । तब से सात दिसंबर को हम अपने सैनिकों की सेवा को याद करते हुए इस दिन को मनाते है, जो देश के दुश्‍मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए । जिन्‍होंने सेना में रहकर  न केवल सीमाओं की रक्षा की बल्कि देश में अशांति पैदा करने वाले आतंकवादियो से मुकाबला कर देश के लिए अपने प्राण न्‍यौछावर कर दिए ।

एयर कमांडो अविनाश कुलकर्णी विशिष्ट सेवा मेडल सेवानिवृत्त संचालक सैनिक कल्याण छत्तीसगढ़ ने कहा कि झण्‍डा दिवस के दिन धनराशि का संग्रह किया जाता है । यह धन लोगों को झंडे का एक स्टीकर देकर एकत्रित किया जाता है । गहरे लाल व नीले रंग के झंडे के स्टीकर की राशि निर्धारित होती है । लोग इस राशि को देकर स्टीकर खरीदते हैं और उसे पिन से अपने सीने पर लगाते हैं। इस तरह वे शहीद या हताहत हुए सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं । जो राशि एकत्रित होती है, वह झंडा दिवस कोष में जमा कर दी जाती है । इस राशि का उपयोग युद्धों में शहीद हुए सैनिकों के परिवार या हताहत हुए सैनिकों के कल्याण व पुनर्वास में खर्च की जाती है। यह राशि सैनिक कल्याण बोर्ड की माध्यम से खर्च की जाती है। देश के हर नागरिक को चाहिए कि वह झंडा दिवस कोष में अपना योगदान दें, ताकि हमारे देश का झंडा आसमान की ऊंचाइयों को छूता रहे।

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