चना को जीएसटी से कर मुक्त करने के लिए राजनांदगांव सांसद संतोष पाण्डेय ने जताया आभार

Chhattisgarh

रायपुर : छत्तीसगढ़ में पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा चना वितरण योजना की शुरुआत की थी. इस योजना के तहत कुपोषण से प्रदेश को मुक्त करने चना को पौष्टिक आहार के रूप में वितरित किया जाता रहा है. कुछ दिनों पूर्व सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की कांग्रेस सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया था जिसका विरोध सत्ताधारी सरकार को झेलना पड़ा था और पुनः इसे शुरू करना पड़ा.

विगत दिनों 19 सितंबर को राजनांदगांव सांसद  संतोष पांडे के नेतृत्व में चना बुटाना निर्माता संघ के सदस्यों एवं छत्तीसगढ़ सेल्स टैक्स बार काउंसिल के अध्यक्ष  सुरेश एच. लाल एवं पूर्वा जिला पंचायत अध्यक्ष  भरत वर्मा ने केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री  अनुराग ठाकुर से नई दिल्ली में मुलाकात की थी. सांसद  संतोष पांडे ने वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर के समक्ष फूटा चना के निर्माताओं के समक्ष आने वाली कठिनाइयां एवं फूटा चना के आम जनता के आहार होने साथ ही छत्तीसगढ़ के आदिवासियों द्वारा एक प्रकार से इसे बादाम के रूप में ग्रहण करने की बात रखी और फूटा चना को जीएसटी के दायरे से बाहर रखने का आग्रह किया था. मंत्री महोदय द्वारा इस संबंध में उचित विचारणा का आश्वासन दिया गया एवं 20 सितंबर को आयोजित जीएसटी काउंसिल की बैठक में काउंसिल द्वारा चना बुटाना को जीएसटी के दायरे से बाहर करने का निर्णय लिया इससे पौष्टिक आहार के रूप में चना के इस्तेमाल में सुविधा होगी.

इस निर्णय के लिए राजनांदगांव सांसद  संतोष पाण्डेय  ने केन्द्रीय वित्त मंत्री  निर्मला सीतारमन , केन्द्रीय राज्य मंत्री  अनुराग सिंह ठाकुर और जीएसटी काउन्सिल के सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए उनका आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि देश को कुपोषण से मुक्त करने के लिए जनता को पौष्टिक आहार मुहैय्या कराने के लिए यह एक सराहनीय निर्णय है।

उन्होंने कहा कि मैनें कुछ दिनों पूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात कर चना को जीएसटी कर से मुक्त करने के लिए ज्ञापन सौंपकर आग्रह किया था और उन्होंने मुझे इसके प्रति आश्वस्त भी किया था. मेरे आग्रह को संज्ञान में लेते हुए उन्होंने इसे पूरा किया जिसके लिए मुझे बहुत ही ख़ुशी है.अब प्रदेश सहित देशभर में चना जीएसटी कर मुक्त मिलेगा. छत्तीसगढ़ में बहुतायत संख्या में खासकर आदिवासी इलाकों में चना का नियमित सेवन किया जाता है.

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