रायगढ़ : 8 सितंबर। छत्तीसगढ़ पुलिस के “साइबर जागृति अभियान” का असर अब आम लोगों की जागरूकता में भी दिखाई देने लगा है। साइबर ठगों द्वारा फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर आतंकवादी मामले में फंसाने की धमकी देने के बावजूद एक रिटायर्ड शिक्षक ने घबराने के बजाय ठगी के प्रयास को नाकाम कर इसकी सूचना पुलिस को दी।
पुलिस के अनुसार, 8 सितंबर को रिटायर्ड शिक्षक एवं केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अधिकारी तिलक कुमार कटकवार पुलिस कार्यालय रायगढ़ पहुंचे और उन्हें आए संदिग्ध कॉल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शाम के समय उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई स्थित केंद्रीय कमिश्नर कार्यालय का अधिकारी बताया और कहा कि दो आतंकवादी पकड़े गए हैं, जिनके पास से उनके नाम का सिम कार्ड मिला है।
कॉलर ने तिलक कुमार कटकवार को आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त होने की बात कहकर डराने और दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि, वे साइबर ठग के झांसे में नहीं आए और स्पष्ट रूप से कहा कि वे उसकी बातों में नहीं आने वाले हैं। इसके बाद उन्होंने खुद पुलिस कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी।

कटकवार ने लोगों से अपील की कि अनजान नंबरों से आने वाले ऐसे कॉल से घबराएं नहीं और किसी भी व्यक्ति के साथ बैंक खाता, एटीएम, ओटीपी, यूपीआई, आधार या अन्य निजी जानकारी साझा न करें। पुलिस अधिकारी बनकर गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी गतिविधि या किसी आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी देना साइबर ठगी का तरीका हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत कॉल काटकर पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।
घरघोड़ा, खरसिया और तमनार में भी जागरूकता अभियान :-
साइबर जागृति अभियान के तहत जिले के घरघोड़ा, खरसिया और तमनार क्षेत्रों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। पुलिस ने थानों में आने वाले लोगों को साइबर अपराध से बचाव के उपाय बताए और उन्हें “साइबर अवेयरनेस सेल्फी” लेकर सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए प्रेरित किया।
गांवों से क्रिकेट मैदान तक पहुंचा साइबर सुरक्षा का संदेश
पूंजीपथरा पुलिस ने छर्राटांगर, सराईपाली और पूंजीपथरा क्षेत्र में पोस्टर-बैनर के माध्यम से लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया। पुलिस टीम ने क्रिकेट टूर्नामेंट में पहुंचे युवाओं के बीच भी साइबर सुरक्षा का संदेश दिया।
पुलिस ने युवाओं को ऑनलाइन गेमिंग, फर्जी नौकरी, लोन ऐप, सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट, फर्जी निवेश, यूपीआई कलेक्ट रिक्वेस्ट और केवाईसी अपडेट के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान रहने की सलाह दी। पुलिस ने कहा कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें और सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सार्वजनिक करने से बचें।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि “डिजिटल गिरफ्तारी” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर पूछताछ, गिरफ्तारी या खाते में पैसे जमा करने का दबाव बनाए तो तत्काल कॉल काटकर पुलिस को सूचना दें।
अभियान के दौरान थाना पूंजीपथरा के प्रशिक्षु उप निरीक्षक मनीष पोया, आरक्षक ओमप्रकाश तिवारी, विनोद शर्मा एवं नरेंद्र पैंकरा सहित पुलिस टीम मौजूद रही।
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