रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष द्वितीय सेमेस्टर की कीटशास्त्र परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के मामले में रायपुर पुलिस ने महज 36 घंटे के भीतर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी एवं मास्टरमाइंड भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग के प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पेपर खरीदने वाले सभी आरोपी इसी कॉलेज के छात्र हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 11 हजार रुपये नगद, छह मोबाइल फोन, वीडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस, केबल तार, मोबाइल कनेक्टर, सुई, सुजा, कॉपी और फेविकोल बरामद किए गए हैं। मामले में दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

17 अगस्त को लिया प्रश्नपत्र, घर ले जाकर बनाया वीडियो :-
जांच में सामने आया कि आरोपी प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया पिछले करीब एक साल से अपने कॉलेज की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने और आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त करने के लिए कृषि महाविद्यालय रायपुर आता था।

17 अगस्त 2026 को वह भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग की उत्तर पुस्तिकाएं जमा करने जोरा स्थित कृषि महाविद्यालय, रायपुर पहुंचा था। इसके बाद उसने आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र प्राप्त किए और उन्हें अपने कॉलेज ले गया।
हालांकि, 20 अगस्त को होने वाली एजीसीएच-221 (कीटशास्त्र) परीक्षा का प्रश्नपत्र वह अपने घर ले गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने प्रश्नपत्र वाले लिफाफे में सुई और नुकीले उपकरण से छोटा छेद किया और मोबाइल कैमरा अंदर डालकर प्रश्नपत्र की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली।इसके बाद प्रश्नपत्र की सामग्री की नकल तैयार कर उसने अपने कॉलेज के छात्र अजय नायक समेत तीन छात्रों को 11 हजार रुपये में बेच दिया।

छात्रों के बीच फैल गया प्रश्नपत्र :-
पुलिस के अनुसार, अजय नायक ने आगे यह प्रश्नपत्र त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू को उपलब्ध कराया। इसके बाद प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से वायरल हो गया।
20 अगस्त को परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने की जानकारी विश्वविद्यालय तक पहुंच गई। सुबह करीब 8:41 बजे कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, कवर्धा के ई-मेल पर तथा करीब 8:54 बजे संबंधित अधिकारियों के ई-मेल पर पेपर लीक की सूचना मिली। छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने भी व्हाट्सऐप के माध्यम से प्रश्नपत्र के कुछ प्रश्न वायरल होने की जानकारी दी।
100 से ज्यादा पुलिसकर्मी, कई जिलों में दबिश :-a
मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर पुलिस ने एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और थाना तेलीबांधा पुलिस की संयुक्त टीम बनाई। 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को जांच में लगाया गया।कबीरधाम, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और आसपास के जिलों में अलग-अलग टीमें भेजी गईं। साइबर टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नपत्र, स्क्रीनशॉट, फोटो, मैसेज और पोस्ट का तकनीकी विश्लेषण किया। प्रश्नपत्र सबसे पहले किस अकाउंट, मोबाइल नंबर या डिजिटल माध्यम से प्रसारित हुआ, इसकी पूरी टाइमलाइन और डिजिटल कड़ियों को खंगाला गया।तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस को सबसे पहले अनुज मिंज के संबंध में जानकारी मिली। टीम ने दुर्ग पहुंचकर उसे हिरासत में लिया। इसके बाद पूछताछ और मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क का खुलासा करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।प्रोफेसर निकला पेपर लीक का मास्टरमाइंडपुलिस के मुताबिक, इस पूरे मामले का मुख्य आरोपी योगेश सोनकेसरिया है, जो वर्ष 2019 से भारती एग्रीकल्चर कॉलेज, दुर्ग में प्रोफेसर के पद पर पदस्थ है। जांच में सामने आया कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी प्रक्रिया का लाभ उठाकर उसने प्रश्नपत्र अपने कब्जे में लिया और उसकी रिकॉर्डिंग कर छात्रों को बेच दी।
छह आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश जारी:-
गिरफ्तार आरोपियों में प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया के अलावा छात्र अजय नायक, त्रिदेव पटेल, नितिन पाण्डेय, अनुज मिंज और आदित्य साहू शामिल हैं।पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ थाना तेलीबांधा में अपराध क्रमांक 360/26 के तहत छत्तीसगढ़ सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2008 की धारा 4, 5 एवं 10 तथा धारा 316 बीएनएस के तहत कार्रवाई की है।मामले में संलिप्त दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।पुलिस की इस कार्रवाई से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में महज 36 घंटे के भीतर पूरे नेटवर्क का खुलासा होने का दावा किया गया है।