सुकमा : मयंक गुर्जर (IPS) ने बताया कि 2माओवाद का अंधेरा छंटा, अब सुकमा में विकास और भरोसे की नई सुबह हो चुका है। एक दौर था, जब नक्सलियों के खौफ ने सुकमा के दुर्गम इलाकों और वहां के ग्रामीणों की जिंदगी को डर के साए में घेर रखा था। जंगलों में गोलियों की गूंज और माओवाद का भय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था, लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। नक्सलवाद के साए से बाहर निकलता सुकमा अब विकास, सुरक्षा और भरोसे की नई राह पर आगे बढ़ रहा है। इसी बदलती तस्वीर के बीच सुकमा एसपी मयंक गुर्जर और एएसपी रोहित शाह भारी बारिश के बीच ट्रैक्टर से नाला पार कर दुर्गम गांव अर्लंपल्ली पहुंचे।
पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और समाधान का भरोसा दिलाया। पुलिस की यह पहल महज एक गांव तक पहुंचने की कवायद नहीं, बल्कि उन इलाकों में विश्वास कायम करने की कोशिश है, जहां कभी सुरक्षा बलों का पहुंचना भी चुनौती माना जाता था। आज ग्रामीणों के बीच पुलिस का संवाद बढ़ रहा है और डर की जगह भरोसा व अपनापन ले रहा है।कभी नक्सली खौफ से घिरे इस इलाके में आज ग्रामीण स्वतंत्र भारत की खुली हवा में बेखौफ सांस लेने का एहसास कर रहे हैं। सुकमा की बदलती तस्वीर बता रही है कि जब माओवाद का अंधेरा छंटता है, तो विकास और भरोसे की राह अपने आप खुलने लगती है।