रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने बिजली दरों में बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना बंद किए जाने के विरोध में प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने शुक्रवार को राजीव भवन में पत्रकार वार्ता में कहा कि 1 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन शुरू होगा, जिसमें बिजली दरें कम करने, स्मार्ट मीटर हटाने और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना फिर से लागू करने की मांग की जाएगी।

आंदोलन की रूपरेखा1 अगस्त: सभी जिलों में पत्रकार वार्ता कर बिजली दर वृद्धि का विरोध।2 अगस्त से: घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने और बिजली दर वृद्धि वापस लेने के समर्थन में लोगों से आवेदन व विरोध-पत्र भरवाए जाएंगे।दो माह बाद: एकत्रित आवेदनों के साथ जिला बिजली कार्यालयों का घेराव कर ज्ञापन सौंपा जाएगा।अंतिम चरण: सभी जिलों से मिली पावती के साथ मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा।
कांग्रेस के आरोपदीपक बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जुलाई से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट, गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट और कृषि पंपों की बिजली पर 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की है। उनका दावा है कि भाजपा सरकार बनने के बाद पांचवीं बार बिजली दरें बढ़ाई गई हैं।कांग्रेस का कहना है कि सरकार बनने के बाद अब तक बिजली दरों में 31.23 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है, जबकि कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों में केवल 2 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई थी और उस समय 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना भी लागू थी।स्मार्ट मीटर पर सवालकांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर अधिक खपत दर्ज कर रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं के बिजली बिल तीन से चार गुना तक बढ़ रहे हैं।
साथ ही बिना उपभोक्ताओं की सहमति के अनुबंध भार (लोड) बढ़ाकर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है।दीपक बैज ने यह भी कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने संसद में अप्रैल 2026 में कहा था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह वैकल्पिक हैं और उपभोक्ता की सहमति के बिना सामान्य मीटर को स्मार्ट मीटर में बदलना उचित नहीं है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर जबरन क्यों लगाए जा रहे हैं।कांग्रेस की प्रमुख मांगेंबिजली दरों में की गई बढ़ोतरी वापस ली जाए।400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना दोबारा लागू की जाए।स्मार्ट मीटर हटाए जाएं।कांग्रेस ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्मार्ट मीटर को लेकर फैसले बदले गए हैं और छत्तीसगढ़ सरकार को भी जनहित में ऐसा कदम उठाना चाहिए।