फूलों की खुशबू से महकी किस्मत: परंपरागत खेती छोड़ किसान ने लिखी सफलता की नई कहानी

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रायपुर, 29 अप्रैल 2026।परंपरागत खेती (गेहूं-धान) के मुकाबले फूलों की खेती अब किसानों के लिए ज्यादा लाभकारी साबित हो रही है। कम लागत में 3-4 गुना तक अधिक मुनाफा देने वाली इस खेती ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई उम्मीद जगाई है। गेंदा, गुलाब और गुलदाउदी जैसे फूलों की सालभर मांग रहने से किसानों को हर सीजन में बेहतर दाम मिल रहे हैं। शादी, त्योहार और धार्मिक आयोजनों में लगातार मांग के चलते यह खेती आय का स्थायी स्रोत बनती जा रही है।रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम गमेकेरा में एक किसान ने इस बदलाव की मिसाल पेश की है। पहले धान की पारंपरिक खेती करने वाले इस किसान ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत फूलों की खेती अपनाकर अपनी आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है।

वर्ष 2025-26 में 0.400 हेक्टेयर भूमि पर गेंदा फूल की खेती शुरू की गई। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और वैज्ञानिक पद्धति से की गई खेती का परिणाम बेहद सकारात्मक रहा। पहले जहां धान की खेती से सीमित आय होती थी, वहीं अब करीब 38 क्विंटल उत्पादन के साथ कुल आमदनी लगभग 3 लाख 4 हजार रुपये तक पहुंच गई। लागत निकालने के बाद करीब 2 लाख 59 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जो पारंपरिक खेती से कई गुना अधिक है।इस सफलता के बाद खेती के प्रति नजरिया बदला है। अब इस मॉडल को आगे बढ़ाने और क्षेत्र का विस्तार करने की योजना है। खेतों में खिले गेंदा के फूल न केवल मेहनत की पहचान बन गए हैं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा भी बन रहे हैं।गांव के अन्य किसान भी अब उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं और विभाग से संपर्क कर फूलों की खेती अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। इस तरह सरकारी योजनाएं किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि के स्वरूप में भी सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।

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