रायपुर/पहलगाम, 28 अप्रैल 2026।जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आयोजित प्राक्कलन समिति (Estimate Committee) की अध्ययन बैठक में रायपुर सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के आर्थिक विकास, बैंकिंग व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों पर तीखे सवाल उठाए। बैठक में वित्त मंत्रालय, एमएसएमई मंत्रालय, एसबीआई, जम्मू-कश्मीर बैंक और स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

ऋण वितरण में गिरावट पर नाराजगीसांसद अग्रवाल ने वर्ष 2023-24 की तुलना में 2025-26 में लोन डिस्बर्समेंट घटने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मुद्रा और स्वनिधि जैसी योजनाओं में केवल कागजी औपचारिकताएं पूरी हो रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक राशि पहुंचने की रफ्तार बेहद धीमी है। उन्होंने बैंकों से ₹5 लाख, ₹10 लाख और ₹20 लाख के ऋणों का अलग-अलग डेटा प्रस्तुत करने को कहा, ताकि वास्तविक लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सके।कारीगरों और युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट जरूरीबैठक में उन्होंने पारंपरिक कारीगरी के घटते दायरे पर चिंता जताते हुए कहा कि छोटे कारीगर हाशिए पर जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि स्थानीय कला और शिल्प को बचाने तथा युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौन-कौन सी नई योजनाएं लागू की जा रही हैं।फूड प्रोसेसिंग और उद्योगों पर जोरसांसद ने कहा कि केवल कृषि पर निर्भर रहकर आर्थिक स्थिति नहीं सुधर सकती। जम्मू-कश्मीर में फलों और सब्जियों की भरपूर उपलब्धता के बावजूद प्रोसेसिंग यूनिट्स की कमी है। उन्होंने बैंकों और उद्योग विभाग से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की, ताकि वैल्यू एडिशन के जरिए स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।धारा 370 के बाद रोजगार सबसे बड़ी चुनौतीअग्रवाल ने कहा कि धारा 370 हटने और आतंकवाद में कमी के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर बड़े हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स और उद्योग स्थापित करने पर जोर दिया, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो सके।विश्वकर्मा योजना पर भी उठाए सवालपीएम विश्वकर्मा योजना के तहत करीब 13 हजार रजिस्ट्रेशन के बावजूद कम वितरण पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने समिति के समक्ष प्रस्ताव रखा कि एमएसएमई के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए एक विशेष और प्रभावी रोडमैप तैयार किया जाए।अंत में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि जब तक बैंक और सरकारी विभाग मिलकर अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचाएंगे और युवाओं को कौशल व रोजगार से नहीं जोड़ेंगे, तब तक समग्र विकास संभव नहीं है।