धरमजयगढ़ :14जुलाई2025, शासन जनता की भलाई के लिए संसाधन भेजता है, लेकिन धरमजयगढ़ नगर पंचायत में यही संसाधन ‘जनता की सेवा’ के बजाय ‘जुगाड़ और जुर्म की सेवा’ में लग गए हैं। बिजली-सड़क सुधारने के लिए आई मशीनें आज प्राइवेट कंपनियों के मुनाफे के लिए काम कर रही हैं। यह महज़ लापरवाही नहीं, खुली लूट है-और सबसे हैरानी की बात यह कि पूरा नगर परिषद शांत है! अधिकारी मौन।

सरकारी स्काईलिफ्टर, ठेकेदारों की गुलामी में : – नगर पंचायत की स्काईलिफ्टर मशीन का काम था स्ट्रीट-लाइट दुरुस्त करना, मगर इन दिनों यह मशीन मलका कंपनी के बिजली-पोल लगाने के लिए पेड़ काटने में लगी है। नगर के मिस्त्री और कर्मचारी शहर की बिजली छोड़ कर कंपनी के ठेकेदार की सेवा में जुटे हैं। नतीजा-गलियों में अंधेरा।
न रसीद, न अनुमति-पूरा सिस्टम ‘काले’ धंधे में : – विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, स्काईलिफ्टर और जेसीबी मशीन के निजी उपयोग की एक भी रसीद कार्यालय में जारी नहीं हुई। यानी सरकारी मशीनें निजी काम पर लगी हैं और पैसा सीधे ‘साहब’ की जेब में जा रहा है। जेसीबी हो या स्काईलिफ्टर, दिन-भर निजी काम, शाम को सरकारी यार्ड में पार्क—और किसी से कुछ पूछा तक नहीं जाता।
सूत्रों के मुताबिक नियम किताबों में दफन, ‘मर्जी का राज’ ज़िंदा : मशीनें आते समय नियम बना था क्या कि निजी काम के लिए पहले फीस जमा कर रसीद ली जाएगी। अब साहब लोग खुद तय करते हैं कितनी रकम लेनी है; रसीद-की कोई ज़रूरत नहीं-नकद पकड़ाओ, मशीन ले जाओ। नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
नगर परिषद चुप क्यों!, आखिर कौन है हिस्सेदार ! क्या नगर अध्यक्ष को खबर है,पार्षदों ने आंखें क्यों मूंद रखी हैं!
आखिर जनता के शिकायतों पर जांच क्यों नहीं हो रही है।