त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय स्थापना संबंधी विधेयक संसद में पेश

Chhattisgarh

रायपुर : केन्द्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा 26 मार्च को त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक संसद में पेश किया गया जो भारतीय सहकारिता के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। इसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में शिक्षा ,शोध और प्रशिक्षण में क्रांति लाना है।भारत के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधी विधेयक जो पेश किया गया है उसमें प्रावधान है कि सभी राज्यों के सहकारी प्रशिक्षण संस्थानों को विश्वविद्यालय के अंतर्गत स्कूल या कॉलेज के रूप में पंजीकृत किया जाएगा ,इसमें डिग्री ,डिप्लोमा और पीएचडी पाठ्यक्रम होंगे ।प्रतिवर्ष करीब 8 लाख लोगों को विश्वविद्यालय से प्रमाण पत्र मिलने की उम्मीद है। यह देश में सहकारी शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करेगा।
भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक शशिकांत द्विवेदी ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के द्वारा पेश किया गया त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को सहकारिता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  और सहकारिता मंत्री अमित शाह  के इस दूरदर्शी प्रयास की सराहना करते हुए प्रदेश के सभी सहकारीजनों एवं सहकारिता प्रकोष्ठ की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया है । द्विवेदी ने इस विधेयक को सहकारिता क्षेत्र में बदलाव की नई शुरुआत बताते हुए कहा कि यह भारत के इतिहास में क्रांतिकारी कदम होगा ।सहकारिता आंदोलन बहुत पुराना आंदोलन है ,किंतु अध्ययन के लिए सहकारिता की संस्थाओं को प्रोफेशनल तरीके से चलाने के लिए यह अच्छा प्रयास है । सहकार से समृद्धि का जो नारा प्रधानमंत्री  मोदी  और केंद्रीय सहकारिता मंत्री  अमित शाह  ने दिया है ,उस नारे को साकार करने की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम होगा ।गुजरात में अमूल की नींव डालने वाले त्रिभुवन भाई पटेल के नाम पर त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय नामक विधेयक के लागू होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी ।स्वरोजगार और छोटी उद्यमिता का विकास होगा। सहकारिता की भावना से युक्त आधुनिक शिक्षा से परिपूर्ण सहकारी नेतृत्व पूरे देश को प्राप्त होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश का सहकारी क्षेत्र नई गति और शक्ति के साथ आगे बढ़ रहा है ।सहकारिता के चहुंमुखी विकास के उद्देश्य से मोदी जी द्वारा स्वायत्त सहकारिता मंत्रालय की स्थापना 6 जुलाई 2021 को की गई। जिसके बाद नई-नई पहलें ,अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग और विविध कार्यों के समावेश से सहकारिता के क्षेत्र को नया आयाम मिला है। इसी दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह जी द्वारा त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु विधेयक पेश किया गया। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से सहकारी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा ।अनुसंधान और प्रशिक्षण को बल मिलेगा और सहकारी आंदोलन को नई गति मिलेगी। इस विश्वविद्यालय के माध्यम से इस क्षेत्र में डिप्लोमा और डिग्री रखने वालों को नौकरी दी जाएगी। श्री द्विवेदी ने कहा कि आने वाले दिनों में सहकारिता क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित कर सहकार से समृद्धि के मंत्र को साकार करेगा।

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