नदी के बीच में पुल बनाकर बनाया गया है शराब पीने का अड्डा रेस्टोरेंट मालिक बना कर रहे हैं यह काम, इंद्रावती परियोजना के अधिकारी आंख बंद कर बैठे

Chhattisgarh

जगदलपुर बस्तर : एक ओर सरकार नदियों के संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं का शिलान्यास करते नजर आती है तो वहीं दूसरे ओर विभाग के अधिकारियों के रवैए से लगता है ये सारी योजनाएं केवल खाना पूर्ति के लिए है।

मामला बस्तर की जीवनदायनी कही जाने वाली इंद्रावती नदी के संरक्षण क्षेत्रों का है जहां नदी के तटों पर निजी व्यवसायों के द्वारा अवैध तरीके से भवनों का निर्माण कर कही होटल,तो कही शराबियो की सुविधा के लिए पुलो का उपयोग नदी में किया जा रहा है,जिससे नदी में प्रदूषण की दिन ब दिन वृद्धि हो रही है जिससे इंद्रावती की स्थिति बत से बत्तर होती चली जा रही है।नदियों के संरक्षण के विषय में अधिकारियों से शिकायत करने पर विभाग के अधिकारियों द्वारा चुप्पी साध ली जाती है।जिससे साफ प्रतीत होता है की प्रशासन के साथ गांठ के बिना व्यवसाई या निजी भवन निर्माता अवैध निर्माण व नदियों को क्षति पहुंचाने की हिम्मत नही कर सकता।
बस्तर से लगकर बहने वाली इंद्रावती की स्थिति से जनता भाली भांति वाकिफ है जहा पूर्व वर्ष के ग्रीष्मकाल में एक वक्त ऐसा था जहा भारत की नियाग्रा कहे जाने वाली चित्रकूट जलप्रपात में बिलकुल भी धर नही बची थी जिसका कारण कही न कही जल प्रदूषण व रेत खनन रही बावजूद इसके अधिकारियों को इसकी चिंता तक नही रही।
जगदलपुर से सटे इंद्रावती नदी के आस पास के तटों पर धड्डले से अवैध निर्माण किए जा रहे है जो की बरसात के समय डुबान क्षेत्र घोषित है जहा अत्यधिक मात्रा में शराबियों एवं निजी मालिको द्वारा गंदगी कर नदियों को क्षति पहुंचाई जाती है गौरतलब है की नदियों के संरक्षण के लिए पर्यावरण,इंद्रावती विकास प्राधिकरण,जलसंसाधन,एवं खनन विभाग जिम्मेदार है किंतु इन विभागो द्वारा अपने नैतिक अधिकारों का दोहन किया जा रहा है और जिससे इंद्रावती नदी को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य कर्ताओं के हौसले बुलंद होते चले जा रहे है।

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