जांजगीर : जिला जांजगीर के तहसील पामगढ़ दिनांक 22 जून 2019 को ग्राम बरगांव के निवासी बृजेश दिनकर पिता शिवकुमार दिनकर, करण बंजारे पिता राजकुमार बंजारे का आकस्मिक निधन हो गया था, अतः मृत्यु भोज के संबंध में 23 जून को समाज ने मृत्यु भोज की अनिवार्यता पर बैठक कर विचार किया और सूर्यवंशी सतनामी समाज ग्राम बारगांव ने मृत्यु भोज कि अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया। इस फैसला पर ग्रामवासी बड़े बुजुर्ग व युवा ने पूर्णता अपना सहमति प्रदान की।दिनांक 23 जून को सतनामी समाज के प्रमुख लोग उपेंद्रराम दिनकर, उपेंद्र सिंह दिनकर ,सरोज मणि बंजारे, राजा रात्रे, कलीम भवानी ,सखाराम लहरें, पवन, मनहर ,सतराम बंजारे ,आदि ने सहमति प्रदान की।
हम बता दें कि समाज के परिवार में कोई व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर मृत्यु भोज की समाज में अनिवार्यता थी ।समाज के लोगो को खाना खिलाना , पंडित को दान दक्षिणा ,आदि अनिवार्य था । चाहे वह परिवार गरीब हो या अमीर हो ,जो परिवार गरीब रहता है तो भी वह पैसा जुगाड़ कर बंदोबस्त करता था , चाहे उधारी करें यह जमीन गिरवी रखे या बेचे कहीं से पैसा जुगाड़ कर मृत्यु भोज की परंपरा को निभाना पड़ता था।जिससे वह गरीब परिवार। दुख के समय उस परिवार को और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यह सब स्थिति को सूर्यवंशी सतनामी समाज ने गंभीरता से विचार किया और अपने समाज में मिसाल परिवर्तन लाया, जिसको सूर्यवंशी सतनामी समाज ने मृत्यु भोज की अनिवार्यता को सभी ने सहमति देते हुए समाप्त की।