आखिर क्यूं कांग्रेस को वोट न देने की अपील कर रहे भूपेश : विक्रम उसेंडी

Chhattisgarh

छत्तीसगढ़  : रायपुर भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ट्वीट पर पूछा है कि अब ऐसा क्या हो गया है कि 11 सीटों पर जीत का दंभ भरने वाले भूपेश बघेल लोगों से कांग्रेस को वोट न देने की बातें भी कह रहे हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विक्रम उसेंडी ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह ट्वीट धान के समर्थन मूल्य, बिजली बिल हाफ और राशन कार्ड पर 35 किलो चावल पर ही सिमटकर रह गया है। बघेल द्वारा काम पर वोट मांगने की बात कहकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर धर्म-जाति का आरोप लगाना तो चुनाव में अपनी तयशुदा पराजय का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की पूर्व-पटकथा है। दुनियाभर की उपलब्धियों का शोर मचाकर आखिर में मुख्यमंत्री बघेल ने गिने-चुने तीन आधे-अधूरे काम गिनाए हैं और उनके आधार पर वोट मांगते हुए उन्होंने कहा है कि यदि यह तीनों काम नहीं हुए हों तो किसान और प्रदेश की जनता कांग्रेस को वोट न दे। बदलापुर की राजनीति के नायक बनकर उभरे मुख्यमंत्री बघेल ने परोक्ष तौर पर ही सही, यह तो स्वीकार कर ही लिया कि अब तीन माह के उनके कार्यकाल की कोई उपलब्धियां गिनाने लायक रही नहीं। अच्छा होता मुख्यमंत्री अपने इन तीन कामों की जमीनी सच्चाई को भी महसूस कर लेते तो शायद यह तीन आधे-अधूरे काम भी वे गिनाने की स्थिति में नहीं रहते। उसेंडी ने कर्ज माफी, शराबबंदी, बेरोजगारी भत्ता, निराश्रित वृद्धावस्था पेंशन योजना आदि की विफलताओं पर प्रदेश सरकार पर कटाक्ष किया और कहा कि अपने तीन माह का कार्यकाल बघेल ने प्रदेश को सकारात्मक व रचनात्मक दिशा देने के बजाय नकारात्मक राजनीति में जाया किया। पूर्ववर्ती भाजपा राज्य सरकार की योजनाओं के नाम बदलकर चाटुकारिता की मिसाल पेश करने में लगे मुख्यमंत्री प्रतिशोध और चरित्र हनन की राजनीति में इतना मशगूल रहे कि आज प्रदेश का खजाना खाली हो गया, तीन महीनों में 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज प्रदेश पर लाद दिया। कर्मचारियों-अधिकारियों के वेतन तक का भुगतान नहीं हो रहा है, कानून-व्यवस्था का सरेआम सरकारी संरक्षण में चीरहरण हो रहा है, लोगों का शांति-सुरक्षा के साथ जीना दूभर हो गया है। भाजपा अध्यक्ष उसेंडी ने कहा कि अपने काले कारनामों के ढेर पर खड़े प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री के सामने यह प्रलाप करने की नौबत अगर आई है तो वे स्वयं इस गल्प कथा के रचयिता और नायक हैं। उसेंडी ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री बघेल कि खिलाफ कहीं कांग्रेस में सत्ता-संघर्ष अब गैंगवार की शक्ल तो अख्तियार नहीं कर रहा है? रही बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की, तो धर्म-जाति की राजनीति न उन्होंने कभी की और न करेंगे। धर्म-जाति के खांचों में बांटकर राजनीति करना कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र रहा है और इसके लिए कांग्रेस के नेता आतंकियों और आतंकवाद के पोषक पाकिस्तान के प्रति नरमी भी दिखाते हैं तो आतंरिक सुरक्षा के लिए नासूर बने नक्सलियों से गलबहियां करके उन्हें क्रांतिकारी भी बताते हैं। मुस्लिमों से एकजुट होकर मोदी को हराने की अपील भी कांग्रेस के नेता ही खुलेआम कर रहे हैं, क्या भूपेश बघेल इस वायके से नावाकिफ हैं? लोकसभा में कांग्रेस की तयशुदा हार का ठीकरा उन पर न फूटे, इसलिए बघेल ने यह नया प्रपंच रचा है।

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