रायपुर : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के बाद उपार्जन केंद्रों से उठाव पूरा हो गया है। वहीं मिलरों के डीओ कटने के बाद धान की मिलिंग तेजी से हो रही है। राज्य को केंद्र से इस साल 61.65 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य था। राज्य सरकार ने कार्ययोजना के तहत चावल जमा कराने में शुरू से तेजी दिखाई। अब तक लगभग साढ़े 42 लाख मीट्रिक टन चावल जमा हो गया है। कोयला संकट को देखते हुए रेलवे द्वारा इसकी रैक बढ़ाए जाने के कारण चावल के लिए रैक नहीं मिल पा रही है। वहीं चावल रखने की जगह नहीं होने के कारण भी इसकी गति धीमी है। राज्य शासन जुलाई माह तक केंद्र की दिए जाने वाले चावल जमा कराने का दावा कर रहा है।
खरीफ वर्ष 2021-22 के लिए की गई धान खरीदी के बाद मिलिंग का काम भी शुरू कर दिया गया था। राज्य में कस्टम मिलिंग के लिए अब तक 97.89 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। राज्य सरकार द्वारा केंद्रीय पूल में चावल जमा कराने के मामले में भी तेजी से काम किया जा रहा है। अब तक केंद्रीय पूल में भारतीय खाद्य निगम में 22.51 लाख मीट्रिक टन और नागरिक आपूर्ति निगम में 19.93 लाख मीट्रिक टन चावल जमा कराया जा चुका है। खाद्य सचिव टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि इस वर्ष धान खरीदी के साथ ही उठाव एवं कस्टम मिलिंग का काम तेजी के साथ शुरू कर दिया गया था। राज्य में अब तक डीओ और टीओ के माध्यम से 97.89 लाख मीट्रिक टन धान का रिकार्ड उठाव हो चुका है।
96 प्रतिशत धान का उठाव
75 लाख 9 हजार मीट्रिक टन धान का डीओ जारी कर दिया गया है। उपार्जन केंद्रों से मिलर्स द्वारा 74 लाख 98 हजार मीट्रिक धान का उठाव कर लिया गया है। इसी प्रकार 22 लाख 90 हजार मीट्रिक टन धान के परिवहन के लिए टीओ जारी किया गया है, जिसके विरुद्ध समितियों से 22 लाख 90 हजार मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है।
सितंबर तक का समय
बताया जाता है कि केंद्रीय पूल में चावल जमा कराने के लिए सितंबर माह तक का समय होता है। राज्य शासन चाहे तो अतिरिक्त समय देने का भी प्रावधान है। राज्य में इस साल धान के उठाव में आई तेजी के कारण संग्रहण और उपार्जन केंद्रों से उठाव किया जा रहा है। मिलिंग का कार्य तेजी से चल रहा, इसके कारण प्रतिदिन 15 से 30 हजार टन चावल जमा हो रहा है। राज्य सरकार मिलिंग का कार्य बरसात के पहले पूरा करने का प्रयास कर रही है।