विश्वविद्यालय राजनीति का प्लेटफार्म न बने इसलिए राज्यपाल को कुलाधिपति बनाया गया

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चित्रा पटेल : रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति नियुक्ति को चल रहे विवाद के बीच राज्यपाल अनुसुइया उइके ने साफ कहा कि संविधान ने देश के सभी विश्वविद्यालयों के लिए राज्यपाल को कुलाधिपति बनाया है। ये इसलिए किया गया है ताकि विश्वविद्यालय राजनीति प्लेटफार्म न बने और विश्वविद्यालयों में शिक्षा के क्षेत्र में अच्छी गुणवत्ता बनी रहे। शिक्षा में सुधार हो और बच्चों को अच्छा भविष्य मिले सके।
राज्यपाल ने कहा कि कुलपति किसे नियुक्ति करना है, ये राज्यपाल का विशेषाधिकार है।आपको बता दें राज्यपाल का ये बयान उस वक्त सामने आया है।जब इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में स्थानीय कुलपति की नियुक्ति की मांग लगातार उठ रही है। राज्य सरकार भी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, अधिकारी, कर्मचारियों की स्थानीय कुलपति बनाय जाने की मांग का समर्थन किया है।इससे राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन रही है।
क्वालिफाइड है तो उसको मौका मिलना चाहिए
खैरागढ़ का विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति मैंने ही किया है।जहां तक बात करते हैं कि स्थानीय होना चाहिए। अगर क्वालिफाइड है तो उसको मौका मिलना चाहिए । तो इतना बड़े प्रदेश में भौगोलिक दृष्टि से 32 परसेंट ट्राबल है । 14% एसटी का है । बाकी पिछड़ा वर्ग के लोग हैं। तो क्या आप चाहते हैं कि एक ही समाज के लोग केवल कुलपति बने अन्य समाज के लोग नहीं। अगर देखा जाए तो 14 विश्वविद्यालय में केवल एक ही समाज के ही लोगों को कुलपति का दायित्व है। कुलपति नियुक्ति का नियम जहां तक कुलपति नियुक्ति का नियम है इसमें तीन लोगों की कमेटी बनती है । हर विश्वविद्यालय के कानूनों में प्रावधान है एक यूजीसी का मेंबर होगा । एक सरकार का होगा और एक कुलाधिपति का होगा। इसका अध्यक्ष गवर्नर होता है मगर कृषि विश्वविद्यालय में कृषि विश्वविद्यालय बोर्ड, शासन और एक मेरा अपना होता है। जिसमें जितने भी विज्ञापन राजभवन से निकाला जाता है ऑल इंडिया बेस पर इसलिए निकाला जाता है। ऑल इंडिया में अच्छे क्वालीफाई मेरिट आधार पर अगर और लोग किसी विश्वविद्यालय में कुलपति बनकर आते हैं तो उससे यूनिवर्सिटी का विकास होगा और बच्चों का प्रभाव होगा।

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