नवजात शिशु की मौत का तथ्यात्मक कारण

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रायपुर. 21 जुलाई 2021. पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय-डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग द्वारा संचालित जिला अस्पताल पंडरी के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU)में मंगलवार को नवजात शिशुओं की मौत से संबंधित समाचार विभिन्न समाचार पत्रों एवं एक न्यूज चैनल द्वारा प्रसारित व प्रकाशित किया गया जो कि तथ्यों से परे भ्रामक एवं अतिरंजित है। समाचार में 7 नवजात शिशुओं के मौत की बात प्रसारित की जा रही है जबकि अस्पताल के नियोनेटल केयर यूनिट में मृत नवजात शिशुओं की संख्या केवल 2 है। पहले नवजात जिसकी मृत्यु हुई वह बेबी ऑफ दुर्गेश्वरी तथा दुर्ग जिले के सूरपा नामक स्थान से संबंधित है तथा दूसरा नवजात माना बस्ती निवासी बेबी ऑफ जानकी सिन्हा से संबंधित है। इस प्रकार केवल 2 शिशुओं की ही मौत हुई है।

माना बस्ती निवासी गर्भवती महिला जानकी सिन्हा पति घनश्याम सिन्हा को माना स्वास्थ्य केंद्र से रिफर कराकर परिजनों द्वारा जिला अस्पताल स्थित स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में सोमवार की सुबह 7.45 भर्ती कराया गया जहां पर सुबह 9.12 मिनट पर उन्होंने एक शिशु (लड़के /male child)को जन्म दिया। यह प्रसूता जानकी सिन्हा का चौथा बच्चा था। जन्म के तुरंत बाद शिशु नहीं रोया और ना ही कोई प्रतिक्रिया दी। नवजात के दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह नहीं होने के कारण उसे झटके आने लगे थे। अतः शिशु की गंभीर स्थिति को देखते हुए फौरन नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट/NICU ) में शिफ्ट किया गया जहां पर शिशु का उपचार जारी था। नवजात की गंभीर हालत के बारे में उनके पिता घनश्याम सिन्हा को पूरी जानकारी दी गई थी। इसी दौरान मंगलवार 20 जुलाई को शाम 8 से 9 बजे के बीच शिशु की उपचार के दौरान ही मौत हो गई। शिशु की वास्तविक गंभीर स्थिति से अवगत होने के बाद भी परिजनों द्वारा जिला अस्पताल में हंगामा किया गया तथा मीडिया को बुलाकर अराजक स्थिति निर्मित की गई।

समाचार में गरियाबंद से शिशु की मौत की बात कही गई है जो कि पूरी तरह असत्य है। गरियाबंद से किसी बच्चे की मृत्यु नहीं हुई है बल्कि गरियाबंद से आये शिशु के लिये अस्पताल द्वारा 10 हजार रुपये मूल्य की दवा सर्फेक्टेंट (surfactant) उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा रहा है। इसके बावजूद भी नवजात शिशु के पिता द्वारा नशे में धुत होकर हंगामा किया गया। नवजात की मृत्यु के बाद उनके परिजनों द्वारा अस्पताल परिसर में जिस प्रकार की अशांति का वातावरण निर्मित किया गया उससे गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती बाकी नवजातों के परिजन भी घबरा गए और उनके द्वारा भी अपने-अपने नवजातों को देखने की जिद करने की बात सामने आई।

नवजातों के बेहतर एवं समय अनुकूल चिकित्सकीय प्रबंधन हेतु प्रसिद्ध प्रदेश के सबसे विश्वसनीय चिकित्सा संस्थान मेडिकल कॉलेज अस्पताल रायपुर के बाल्य एवं शिशु रोग विभाग द्वारा नवजातों को बेहतर उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। अतः परिजनों द्वारा भीड़ इकट्ठा कर मीडिया को बुलाकर हंगामे का प्रदर्शन करना, भ्रामक जानकारी देकर सनसनी फैलाना, अतिश्योक्तिपूर्ण समाचार का प्रकाशन, वर्ष के 365 दिन चौबीस घंटे मरीजों की सेवा में लगे चिकित्सकों एवं समस्त पैरामेडिकल स्टॉफ के मनोबल को गिरानेवाला है। अतः कृपया विभिन्न समाचार माध्यमों द्वारा प्रकाशित नवजात शिशु की मौत से संबंधित समाचार की वास्तविक जानकारी को इस विज्ञप्ति के माध्यम से प्रकाशित करने की अपेक्षा की जाती है।

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