चित्रा पटेल : रायपुर : लगातार पत्रकारों पर दबाव बनाया जाता रहा है ऐसी खबर सुनने को मिलती रहती है यह कोई नई बात नहीं रही है।प्रदेश में पत्रकार आज सुरक्षित नहीं है चाहे बस्तर में हो या कोरिया में हो या राजधानी में हो पत्रकार असुरक्षित हैं। ऐसी कई घटनाएं पत्रकारों के साथ हो चुकी है। हाल ही में बस्तर के पत्रकारों को माओवादियों ने धमकी भरे पत्र भी जारी किया था और 16 तारीख को सरगुजा में भी एक पत्रकार खबर बनाने गया था उस दौरान पत्रकार के साथ मारपीट का मामला हुआ था, जिस पर पत्रकार ने सूरजपुर थाना में एफआईआर दर्ज भी किया है।
भूपेश सरकार ने पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की वादें की थी सरकार में आने से पहले लेकिन सरकार की 2 साल पूरा होने के बाद भी अभी तक पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं बन सका है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पूर्व में पत्रकारों द्वारा पूछा गया था जिस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा था कि प्रक्रिया जारी है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकार अंदर की खबरें कवरेज करने जाते हैं उस दौरान जान का खतरा बना रहता है उसके बाद जब भी वापस आते हैं तो पुलिस उनसे पूछताछ के बहाने परेशान करती है। ऐसे में पत्रकार अपनी जान हथेली पर लेकर वहां पर खबर कवरेज करते हैं। इन परिस्थितियों में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू होता है तो छत्तीसगढ़ के पत्रकारों को राहत मिलेगी।