भाजपा अपने स्वयं के भ्रष्टाचार को उजागर करने की अपेक्षा झूठे साक्ष्य तैयार करना चाहती है : कांग्रेस

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छत्तीसगढ़ : प्रधानमंत्री मोदी जी के चेहरे पर हार का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है, माथे पर त्योड़ी, शब्दों में गाली, भाव-भंगिमा में उत्तेजना, मोदी जी की घबराहट, लड़खड़ाहट व छटपटाहट को दर्शाती है। शब्दों की मर्यादा को निम्न स्तर तक गिरा कर जिस प्रकार से ऊँची आवाज में झूठे आरोप मढ़े जा रहे हैं, इसे कहते हैं चोर मचाए शोर। अगस्टा वेस्टलैंड मामले में मोदी जी यही कहावत चरितार्थ कर रहे हैं कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे।

धूल चटाने वाली आसन्न हार को समक्ष देखकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा सरकार झूठ का जाल बुनने, मिथ्या प्रपंच फैलाने तथा भ्रम जाल फैलाने में संलिप्त है ताकि अगस्टा वेस्टलैंड हैलिकॉप्टर खरीद मामले में तथा इसकी मूल कंपनी ‘फिनमेकेनिका’ के मामले में देश के लोगों की आंखों के सामने सच्चाई पर पर्दा डाला जा सके। प्रतिबंधित कंपनी अगस्टा वेस्टलैंड तथा इसकी मूल कंपनी, फिनमेकेनिका को सहायता तथा प्रोत्साहन देने में मोदी सरकार की कुटील भूमिका को छिपाने के लिए मोदी सरकार इस कवरअप षड़यंत्र में लगी हुई है। इस षड़यंत्र का सबसे दिलचस्प पहलू ये है कि मोदी सरकार ने अज्ञातकारणों से एक प्रतिबंधित कंपनी अर्थात, अगस्टा वेस्टलैंड /फिनमेकेनिका को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी दिलवाने में तथा एक हिस्सेदार तथा उप-ठेकेदार के रुप में उसको विभिन्न भारतीय कॉर्पोरेट हाउसेज से अनुमति दिलवाने में सहायता की। स्पष्ट प्रश्न ये है कि सीबीआई ने मोदी सरकार और अगस्टा कंपनी की आपसी सांठगांठ तथा इसमें लेनदेन के पहलूओं की जाँच क्यों नहीं की?

तथ्यः-

1. वैश्विक निविदा के अनुसार 12 हैलिकॉप्टरों की खरीद के लिए अनुबंध फरवरी, 2010 में अगस्टा वेस्टलैंड (मूल कंपनी फिनमेकेनिका) को 3,546 करोड़ रुपए की राशि के साथ आवंटित किया गया था।

2. मीडिया रिपोर्ट के मद्देनजर, तत्कालीन कांग्रेस-यूपीए सरकार ने जाँच के आदेश दिए। फरवरी, 2013 में यूपीए सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड सौदे को रद्द कर दिया।

3. 12 फरवरी, 2013 को कांग्रेस-यूपीए सरकार ने मामले को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया।

4. मार्च, 2013 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड मामले पर संयुक्त संसदीय समिति के गठन का प्रस्ताव किया, लेकिन भाजपा ने इस मुद्दे पर शामिल होने या सहयोग करने से इंकार कर दिया।

5. 10 फरवरी, 2014 को कांग्रेस-यूपीए सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड और उसकी मूल कंपनी फिनमेकेनिका को ब्लैकलिस्ट करने के लिए कार्यवाही आरंभ कर दी। कांग्रेस-यूपीए सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड द्वारा भारतीय बैंकों में जमा 240 करोड़ रुपए की गारंटी राशि को भी भुना लिया।

6. यूपीए-कांग्रेस सरकार ने मिलान, इटली में अगस्टा वेस्टलैंड के खिलाफ मामला भी दर्ज कर दिया। 23 मई, 2014 को यूपीए-कांग्रेस सरकार ने यूरो 2,28,00,00,00 (दो सौ अट्ठाईस मिलियन) की गारंटी को भुनाने के लिए दायर मामले में जीत हासिल की। (अनुलग्नक ए-1 के रुप में संलग्न रिलीज की प्रति)।

7. इस प्रकार तत्कालीन कांग्रेस-यूपीए सरकार ने 1,620 करोड़ रुपए के भुगतान के बदले अगस्टा वेस्टलैंड से 2,068 करोड़ रुपए वसूल लिए।

इसके अतिरिक्त यूपीए-कांग्रेस सरकार ने इसके 3 हैलिकॉप्टरों को जब्त कर लिया, जो हमारे कब्जे में हैं। इन हैलिकॉप्टरों का अनुबंधित मूल्य 295.50X3= 886.50 करोड़ रुपए है। इस प्रकार कांग्रेस-यूपीए सरकार ने 1,620 करोड़ रुपए के भुगतान के एवज में अगस्टा वेस्टलैंड से कुल मिलाकर 2,954 करोड़ रुपए वसूल कर लिए।

8. कांग्रेस-यूपीए सरकार ने नोटिस जारी करके और कार्यवाही आरंभ करके अगस्टा वेस्टलैंड-फिनमेकेनिका को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरु कर दी। इसके परिणाम स्वरुप 03/07/2014 के विस्तृत आदेशानुसार अगस्टा वेस्टलैंड को प्रतिबंधित/ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। (अनुलग्नक ए-2 के रुप में संलग्न रिलीज की प्रति)।

अगस्टा वेस्टलैंड के साथ भाजपा/मोदी सरकार की सांठगांठ तथा मिलीभगतः-

1. जुलाई, 2014 में मोदी सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड और उसकी मूल कंपनी फिनमेकेनिका पर लगे प्रतिबंध को समाप्त करने के लिए अपने अटॉर्नी जनरल से राय ली। मोदी सरकार ने रक्षा मंत्रालय द्वारा इस संबंध में जारी 22/07/2014 के आदेश की एक कॉपी सलंग्नक ए-3 के रुप में लगा दी गई है।

2. अगस्त, 2014 में भारत के विदेशी निवेश संवंर्धन बोर्ड ने भारत में एडब्ल्यू-119 सैनिक परीक्षण और निगरानी हैलिकॉप्टर के उन्नत मॉडल का उत्पादन करने के लिए अगस्टा वेस्टलैंड और टाटा के बीच संयुक्त उद्यम-इंडियन रोटो क्राफ्ट लिमिटेड (आईआरएल) को अंतिम मंजूरी दे दी।

3. मोदी सरकार ने अगस्टा वेस्टलैंड को भारतीय कॉर्पोरेट के साथ साझेदारी में सौ नौसेना उपयोक्ता हैलिकॉप्टरों के लिए भी बोली लगाने की अनुमति दे दी।

इस समग्र प्रक्रिया का परिणाम ये रहा कि अगस्टा वेस्टलैंड और इसकी मूल कंपनी फिनमेकेनिका को सीबीआई के समक्ष इसका मामला लंबित होने के बावजूद तथा निष्ठा की शर्त की अवहेलना के बावजूद, जिसके कारण इसका अनुबंध समाप्त कर दिया गया था, इस कंपनी पर लगे प्रतिबंध को वापस ले लिया गया। इतना ही नहीं मोदी सरकार ने जुलाई, 2014 में अपने अटॉर्नी जनरल से विशेष राय लेकर अगस्टा वेस्टलैंड/फिनमेकेनिका को ‘मेक इन इंडिया’ का हिस्सा बनने और नौसेना उपयोगिता हैलिकॉप्टरों के अलावा विदेशी निवेश के माध्यम से निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने के साथ-साथ टाटा के साथ साझेदारी में एडब्लयू-119 हैलिकॉप्टरों के निर्माण के लिए विदेशी निवेश संबर्धन बोर्ड द्वारा अनुमति भी प्रदान कर दी। संयोगवश श्री अरुण जेटली उस समय देश के रक्षा मंत्री थे।

इसके पश्चात मोदी सरकार अगस्टा वेस्टलैंड और फिनमेकेनिका के खिलाफ सभी मुकदमे हार जाती है।

1. 8 जनवरी, 2018 को इटली के एक अपीलीय न्यायालय द्वारा 12 हैलिकॉप्टरों की भारत को बिक्री के मामले में श्री जिएसेपे ओर्सी, पूर्व मुख्य कार्यकारी तथा श्री ब्रूनो स्पेग्नोलिनी, हैलिकॉप्टर यूनिट के पूर्व प्रमुख को बरी कर दिया। मोदी सरकार इस मामले में नुकसान की भरपाई के लिए सिविल पार्टी थी।

2. 17 सितम्बर, 2018 को मिलान, इटली में एक उच्च न्यायालय ने 322 पृष्ठ के एक विस्तृत फैसले में इस आदेश की पुष्टि की और किसी भी भारतीय अधिकारी द्वारा कोई भी भ्रष्टाचार या गलत कार्य न होने के निर्णय की पुष्टि की। इस मामले में मोदी सरकार एक पार्टी थी और वह हार गई। मोदी सरकार ने इस मामले में अपील दायर न करने का विकल्प चुना। ऐसे में जबकि भाजपा और मोदी सरकार अगस्टा वेस्टलैंड मामले में उनकी अपनी मिली-भगत तथा संलिप्तता की सीबीआई द्वारा जाँच के बिना झूठा श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं तथा विपक्षी नेताओं के खिलाफ दुष्प्रचार के उद्देश्य से वे क्रिश्चियन मिशेल का सहारा लेने का प्रयास कर रहे हैं। परंतु क्रिश्चियन मिशेल से जुड़ी तथ्यात्मक सच्चाई पहले ही लोगों के समक्ष आ चुकी है।

27 जुलाई, 2018 को क्रिश्चियन मिशेल को दुबई में हिरासत में लिया गया था। क्रिश्चियन मिशेल के वकील मिस रोजमेरी और पैट्रिजी डोस अंजोस द्वारा दिए गए वक्तव्य में ये पूरी तरह स्पष्ट किया गया है कि मोदी सरकार और इसकी एजेंसियाँ क्रिश्चियन मिशेल को ऐसे झूठे कबूलनामे के वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर कर रहीं थी, जिसमें यूपीए की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी को नामित किया जा सके, जिसके बदले में श्री क्रिश्चियन मिशेल के खिलाफ जो भी आरोप अगस्टा वेस्टलैंड मामले में हों उन्हें आरोप मुक्त कर दिया जाएगा। यहाँ तक की क्रिश्चियन मिशेल की बहन ने भी सार्वजनिक रुप से ऐसे दवाब को कबूला है कि विपक्षी नेताओं को इस मामले में झूठा फंसाने को क्रिश्चियन मिशेल के लिए आरोप मुक्त होने की एक टिकिट के रुप में दर्शाया जा रहा है। उनके साक्षात्कार को कई भारतीय चैनलों द्वारा भी रिकॉर्ड किया गया है।

भारत के इतिहास में ऐसा कोई भी पूर्व उदाहरण नहीं मिलता कि कभी किसी प्रधानमंत्री को बदला लेने के लिए विपक्षी नेताओं के खिलाफ झूठे सबूत जुटाने में संलिप्त पाया गया हो। यह चौंकाने वाला खुलासा सीबीआई और ईडी में प्रचलित प्रधानमंत्री के समक्ष घुटने टेकने की बीमारी का प्रमाण है, जिसके कारण ये एजेंसियाँ विपक्ष के नेताओं की छवि को धूमिल करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ एक कठपुतली और पिंजरे के तोते की तरह दुर्भावनापूर्ण षड़यंत्र के तहत झूठे और आधारहीन साक्ष्य जुटाने में संलग्न हैं।

समय आ गया है कि चुनावों में जा रहे पाँच राज्यों में आसन्न हार से ध्यान हटाने के लिए, झूठी कहानियाँ गढ़ने की अपेक्षा सीबीआई को प्रधानमंत्री के विरुद्ध उनकी अगस्टा वेस्टलैंड तथा फिनमेकेनिका कंपनियों को दोषमुक्त करने के मामले में जाँच करनी चाहिए।

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