बसना। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेश की लोकसंस्कृति और माटी के गौरव को समर्पित छत्तीसगढ़ी लोकगीत ‘छत्तीसगढ़ के पबरित माटी’ का लोकार्पण बसना विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने किया। यामिनी स्टूडियो छत्तीसगढ़ की इस प्रस्तुति के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक लोककलाओं को संगीत के जरिए सामने लाने का प्रयास किया गया है।

लोकार्पण अवसर पर विधायक डॉ. संपत अग्रवाल ने गीत की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी, लोकसंस्कृति और जनभावनाओं को संगीत के माध्यम से अभिव्यक्त करना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि प्रदेश के खेत-खलिहान, ग्रामीण जीवन, लोकनृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जीवंत तस्वीर है। ऐसी प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का काम करती हैं।
गायिका प्रतिभा त्रिपाठी को दोहरी उपलब्धि
इस गीत की मुख्य गायिका प्रतिभा त्रिपाठी के लिए राज्य स्थापना दिवस का अवसर खास उपलब्धि लेकर आया। उनका चयन राज्य शिक्षक पुरस्कार (सत्र 2026-27) के लिए हुआ है। शिक्षा के साथ संगीत के क्षेत्र में भी उनके योगदान की विधायक डॉ. अग्रवाल सहित उपस्थित लोगों ने सराहना की।
स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा का संगम
गीत को दीपक कुमार साहू और प्रतिभा त्रिपाठी ने अपनी आवाज दी है। इसके वीडियो में गोरे बरिहा और सुषमा कैवर्त ने अभिनय किया है। गीत के बोल शिक्षक एवं साहित्यकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ ने लिखे हैं, जबकि संगीत संयोजन ताम्रध्वज केंवट ने किया है। कमलेश कुमार साहू ने इस प्रोजेक्ट का निर्माण किया है।
गीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग स्वर म्यूजिक एकेडमी एवं रिकॉर्डिंग स्टूडियो, भिलाई में हुई। इसके निर्माण में अमर स्टूडियो गिरसा, तावसिफ जमाल, कोरियोग्राफर संदीप भारती, कैमरामैन रविकांत साहू और वीडियो एडिटर अभिजीत भारती की अहम भूमिका रही। मेकअप टीम में गायत्री साहू, कल्पना चौहान, मिथिलेश साहू, परमानंद निषाद एवं दुर्गेश परघनिया शामिल रहे।
गीतकार प्रेमचन्द साव ‘प्रेम’ शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। बाल साहित्य, कविता और सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर लेखन करने वाले साव ने इस रचना के माध्यम से अपनी जन्मभूमि और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रति भावनाएं व्यक्त की हैं।
राज्य स्थापना दिवस पर जारी यह गीत छत्तीसगढ़ी भाषा, लोकसंगीत और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की एक रचनात्मक पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।