संस्कृति, सेवा और युवा शक्ति से साकार होगा विकसित भारत 2047 का सपना,राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में नुआखाई भेंटघाट : MLA पुरंदर मिश्रा

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रायपुर, 23 अक्टूबर। रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि नुआखाई भेंटघाट, सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सेवा भावना और युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष गौरव प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @ 2047 के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी। युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार, उद्यमिता और नवाचार के माध्यम से देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए। अपनी संस्कृति और संस्कारों से जुड़े रहकर समाजसेवा तथा राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना ही सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मार्ग है।

राजधानी रायपुर में आयोजित नुआखाई भेंटघाट, सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम में संस्कृति संरक्षण, सामाजिक समरसता, जनसेवा और युवा सशक्तिकरण के माध्यम से विकसित भारत @ 2047 के संकल्प को साकार करने का संदेश दिया गया। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं विजय शर्मा सहित कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, टंकराम वर्मा, श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक सुनील सोनी, मोतीलाल साहू, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, भावना बोहरा और संपत अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

आयोजकों ने राष्ट्रपति सहित सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों, युवाओं और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।संस्कृति और सामाजिक समरसता पर जोरकार्यक्रम का उद्देश्य सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ना रहा। नुआखाई पर्व कृषि संस्कृति, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, किसानों के सम्मान और पारिवारिक एकजुटता का प्रतीक है। आयोजन के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।सेवा सम्मान पर्व के जरिए समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण, जनसेवा तथा सामाजिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया।

वहीं, युवा प्रबोधन कार्यक्रम में युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करने का संकल्प व्यक्त किया गया।2047 के भारत में युवाओं की होगी अहम भूमिकावर्ष 2047 में देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होंगे। विकसित भारत की परिकल्पना को केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित न रखते हुए शिक्षित, आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से समरस और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र के निर्माण से जोड़ा गया।कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के साथ रोजगार सृजन, तकनीक के उपयोग के साथ नवाचार और व्यक्तिगत सफलता के साथ सामाजिक दायित्व निभाने की दिशा में भी आगे बढ़ना होगा। शिक्षा, कौशल, डिजिटल सशक्तिकरण और उद्यमिता के माध्यम से युवा देश की विकास यात्रा को नई गति दे सकते हैं।

राष्ट्रपति की उपस्थिति युवाओं के लिए प्रेरणादायीराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का जीवन संघर्ष, सादगी, दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देने वाला उदाहरण बताया गया। उनकी उपस्थिति ने युवाओं को शिक्षा, परिश्रम, आत्मविश्वास और समर्पण के बल पर जीवन में ऊंचे लक्ष्य हासिल करने का संदेश दिया।आयोजन के माध्यम से महिलाओं की समान भागीदारी, किसानों के सम्मान और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

वक्ताओं का संदेश रहा कि विकसित भारत का लक्ष्य सरकार के प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, सामाजिक संगठनों के सहयोग और युवाओं की ऊर्जा से ही हासिल किया जा सकता है।कार्यक्रम के समापन पर संस्कृति के संरक्षण, सेवा के विस्तार, युवा शक्ति के सशक्तिकरण और विकसित भारत @ 2047 के निर्माण का संकल्प दोहराया गया।नुआखाई जुहार! जय हिंद! जय छत्तीसगढ़!

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