लघु वनोपज से वनवासियों और ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय के साधन होंगे सृजित

Chhattisgarh

रायपुर : दिनांक18 सितंबर 2019, मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले लघु वनोपज से वनवासियों और ग्रामीणों को अतिरिक्त आय के साधन सृजित करने बाजार सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वन मंत्री  मोहम्मद अकबर की विशेष पहल पर राज्य में लघु वनोपज आधारित बाजार व्यवस्था का अध्ययन करने और लघु वनोपज आधारित उद्योग विकास की रणनीति निर्धारित करने के लिए वनांचल के हाट बाजारों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ रायपुर द्वारा पहल शुरू करते हुए 14 एवं 15 सितम्बर को वन मुख्यालय अरण्य भवन नवा रायपुर अटल नगर 480 सर्वेक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें वन कर्मचारी, प्रबंधक, फड़मंुशी, छोटे व्यापारी आदि प्रशिक्षक शामिल थे। लघु वनोपज के बाजार सर्वेक्षण 16 से 18 सितम्बर तक किया जाएगा। इस प्रकार लघु वनोपज को न्यूनतम सर्मथन मूल्य पर क्रय करना, प्राथमिक प्रसंस्करण करना तथा लघु वनोपज आधारित उद्योग की स्थापना एवं प्रोत्साहन द्वारा प्रसंस्करण को बढ़ावा देते हुए ग्रामीणों को अतिरिक्त आय सृजित हो इसके लिए विशेष पहल की जा रही है। सर्वेक्षण उपरांत भविष्य प्रणाली निर्धारित कर इस कार्य में जुड़ने के इच्छुक समूह तथा प्रगतिशील उद्यमियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अधिकारियों ने बताया कि वनांचल सीमा से लगे हुए हाट बाजारों को चिन्हित कर सर्वेक्षण दलों द्वारा प्रत्येक हाट बाजार में क्रय किए जाने वाले लघु वनोपज, मात्रा, स्थानीय दर, स्थानीय एवं बाहरी व्यापारी संबंधी विवरण एवं प्रसंस्करण संबंधी जानकारी के साथ ही जिले में इनसे संबंधित उद्योग की जानकारी एकत्रित की जाएगी। सर्वेक्षण के दौरान हाट बाजार तथा गोदाम की जियो टैगिंग भी की जाएगी। जिसके आधार पर भविष्य की रणनीति बनाई जाएगी। सर्वेक्षण में मिली जानकारी का प्रत्येक जिला यूनियन स्तर पर विश्लेषण के बाद लघु वनोपज क्रय के लिए हाट बाजार का चयन, प्रसंस्करण के लिए वन धन विकास केन्द्र (बड़े हाट बाजार) की स्थापना की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि सर्वेक्षण के बाद लघु वनोपज क्रय केन्द्र (छोटे हाट बाजार) वन धन विकास केन्द्र (बड़े हाट बाजार) का संचालन राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, जिला पंचायत तथा महिला बाल विकास द्वारा गठित महिला समूहों के माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए चयनित समूहों को प्रशिक्षण तथा अन्य सुविधाएं मुहैया करायी जाएगी। चयनित केन्द्रों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 20 प्रकार के लघु वनोपज- इमली बीज, साल बीज, महुआ बीज, चिरौंजी गुठली, हर्रा, रंगीनी लाख, कुसुमी लाख, गम कराया (कुलु गोंद), नागरमोथा, शहद, बहेड़ा, बेल गुदा, कालमेघ, फूल झाडू, पुवाड़ बीज, महुआ फूल (सूखा), जामुन गुठली (सूखा), कौंच बीज, धवई फूल (सूखा) करंज बीज लघु वनोपज क्रय किया जाएगा। क्रय के बाद वन धन विकास केन्द्र में प्राथमिक प्रसंस्करण कर उचित भंडारण किया जाएगा। इसके बाद इन्हें उद्योगों को आपूर्ति के साथ ही नये वनोपज आधारित उद्योग स्थापना हेतु प्रयास किया जाएगा।

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