शाखाओं से समाज निर्माण तक: आरएसएस का राष्ट्रव्यापी अभियान, सेवा-संस्कार और ‘पंच परिवर्तन’ पर फोकस

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रायपुर : भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ {आरएसएस (RSS)} अपने संगठनात्मक ढांचे और सेवा कार्यों के जरिए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। संघ का मुख्य उद्देश्य देशभर में दैनिक और साप्ताहिक शाखाओं के माध्यम से हिंदू समाज को संगठित करना, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना और मजबूत ‘मानव सामाजिक पूंजी’ का निर्माण करना है।

शाखा: –

संघ की कार्यशालासंघ का प्रमुख कार्यस्थल ‘शाखा’ है, जहां स्वयंसेवकों को शारीरिक, बौद्धिक और मानसिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इन शाखाओं के जरिए अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना का विकास किया जाता है।

आपदा में सेवा, हर वक्त सहयोगआरएसएस के स्वयंसेवक बाढ़, भूकंप जैसी आपदाओं के दौरान राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रहते हैं। बिना किसी भेदभाव के लोगों की मदद करना संघ की पहचान बन चुकी है।

शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकताविद्या भारती के माध्यम से संघ देशभर में शैक्षणिक संस्थान संचालित करता है। इसके साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में काम कर भारतीय संस्कृति और इतिहास के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

सामाजिक समरसता पर जोरसंघ जातिवाद को खत्म कर समाज में एकता स्थापित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाता है। उद्देश्य है एक संगठित और समरस समाज का निर्माण।

विचारों का प्रसारसंघ अपनी विचारधारा के प्रसार के लिए पाञ्चजन्य और ऑर्गनाइजर जैसी पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है।

‘पंच परिवर्तन’ की नई दिशावर्तमान में आरएसएस ‘पंच परिवर्तन’ के तहत सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी अपनाने और नागरिक कर्तव्यों के पालन पर विशेष जोर दे रहा है।

कुल मिलाकर, आरएसएस अपनी शाखाओं, सेवा कार्यों और वैचारिक अभियानों के जरिए समाज में व्यापक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए संगठन और संस्कार आधारित राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम कर रहा है।

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