राज्य सरकार द्वारा झीरमघाटी की जांच के लिए एसआईटी का गठन करना समझ से परे है : भाजपा
HNS24 NEWS June 22, 2020 0 COMMENTS
- रायपुर : भाजपा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। झीरम घाटी में शहीद हुए कांग्रेस नेताओं को याद करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि करते हुए कहा कि 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों द्वारा कांग्रेस पार्टी के नेताओं का नरसंहार की घटना बहुत ही दुखद थी और इस घटना में हमने अपने अच्छे साथियों को गंवाया था आज कांग्रेस सरकार द्वारा इस विषय को पुनः लाया गया मैं इस संबंध में यह कहना चाहता हूँ जब यह घटना हुई तो उस वक्त कांग्रेस की यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं तत्कालीन गृह मंत्री सुशील शिंदे ने छ.ग. का दौरा किया था और वापस जाकर तत्कालीन गृह मंत्री ने मुझे फोन पर ही NIA जांच की सहमति मांगी थी और हमने तुरन्त NIA जांच की सहमति दे दी। यहां यह बताना भी जरूरी है कि NIA एक्ट यूपीए सरकार के द्वारा ही लाया गया था और NIA देश में आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद जैसी घटनाओं की जांच के लिए बनाई गई संस्था है। चूंकि झीरमघाटी की घटना नक्सलवादियों द्वारा की गई घटना थी इसी कारण तत्कालीन यूपीए सरकार ने NIA को इस घटना की जांच हेतु सबसे उपयुक्त माना होगा।
राज्य सरकार द्वारा झीरमघाटी की जांच के लिए एसआईटी का गठन करना समझ से परे है, मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या राज्य की एसआईटी, देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी NIA से ऊपर है?
हमारी सरकार ने इस घटना की स्वतंत्र जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था, जिसकी जांच जारी है और इस आयोग द्वारा अखबारों में कई बार विज्ञापन दिया गया कि झीरमघाटी के संबंध में किसी भी तरह के सबूत किसी भी व्यक्ति के पास यदि है तो वह इस आयोग को सौंप सकता है। इसके बावजूद 7 साल बाद घटना की जांच हेतु एसआईटी की मांग करना समझ से परे है। मैं यहां आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या राज्य की एसआईटी, एक सिटिंग जज की अध्यक्षता में बने आयोग से ऊपर है?
16 जून 2020 को NIA ने जगदलपुर की विशेष NIA अदालत में याचिका लगाकर आवेदन किया कि मई 2020 में जितेन्द्र मुदलियार द्वारा की गई FIR की जांच भी NIA को सौंप दी जाये क्योंकि इस घटना की जांच NIA पहले से कर रहा है।
एक बात और कही गई कि CBI ने जांच क्यों नहीं किया तो मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि हमने गृह मंत्रालय को CBI जांच के लिए आग्रह किया था चूंकि NIA CBI के समकक्ष एजेंसी है इस कारण CBI ने इस घटना की जांच ना करना उपयुक्त समझा होगा।
NIA जैसी देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी के ऊपर आरोप लगाना सरासर गलत है इस तरह की एजेंसी किसी भी घटना की जांच प्रोफेशनल तरीके से करती है और यदि आपके पास इस घटना से संबंधित कोई सबूत या जानकारी देना चाहते है तो NIA को या न्यायिक जांच आयोग को आज भी सौंप सकते है।
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